जो कल था।'s image
Share0 Bookmarks 77 Reads1 Likes
कैसे भूल सकता हु वो दिन को,

जब नामक रोटी में भी सुकून था।

अन्ना का दान नही था तो क्या,
माँ बाप का फैसला क़बूल था।

आज रिश्वत देता फिरता हूँ,
पाने को वो शक़्स जो कल था।

एक नया सवेरा है एक नई किरण है,
वो पल कहा है जो कल था। लक्ष्य

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts