एक उम्र's image
Share0 Bookmarks 33 Reads1 Likes
एक उम्र बीती ही तेरे इंतेज़ार में,
आफताब से पूछो कितने राते बिताए है साथ मे।

इस दिल का भी क्या करूँ,
हर रोज़ चलता है तेरे ख्याल में।

कसूर तेरे औलाद का भी नही,
जो पेल दिया मुझे सरेआम बाजार में।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts