माँ तुम  सुनहरी धूप सी's image
Mothers DayPoetry2 min read

माँ तुम सुनहरी धूप सी

Kusum LakheraKusum Lakhera June 2, 2022
Share0 Bookmarks 29 Reads0 Likes

माँ तुम सुनहरी पीली धूप समान...

प्रेम की ऊष्मा बिखराती हो ...

न जाने इतनी ममता तुम कहाँ से लाती हो

तुम पीले सरसों के सुष्मित फूलों सी नज़र आती हो 

तुम धूप सी इस धरा को सृजन का देती हो उपहार 

करती हो पेड़ पौधों फूलों से नित प्रकृति का श्रृंगार

सुनहरे भविष्य के लिए तुम अपना आज लुटाती हो !

माँ तुम मुझे सुनहरी धूप सी बहुत भाती हो !

शरद ऋतु में गुनगुनी धूप जैसे हम सबको सुहाती है ..

ऐसे ही माँ हम सबके जीवन में अपनी ममता लुटाती है।

माँ तुम सुनहरे ख्वाब को हम सबके लिए बुनती हो 

पर क्या कभी अपने लिए भी कुछ अच्छा चुनती हो ।

अपने दिल की आवाज को अनसुना कर हमारी सुनती हो 

तुम हमें भव्य कंगूरे की तरह बनाने के लिए .....

अपना अस्तित्व नींव बनने के लिए बलिदान करती हो ।

तुम हमारी उम्मीदों के लिए नित निराशाओं से लड़ती हो।

घोर तिमिर को मिटाने के लिए दीपक सी जलती हो !!

तुम सुनहरी मंगलमय आशा सी खुशियों की धूप लगती हो !!


©®कुसुम लखेड़ा

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts