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मन बैचैन 

भीगे मेरे नयन

बही कविता 


भीतर क्रोध 

बाहर विडम्बना

लिखी कविता 


प्रश्नों का दौर

समस्याओं का शोर 

पढ़ी कविता 


व्यथित मन 

निढाल सा ये तन

गाई कविता 


शहर मौन 

न पूछे तुम कौन 

चीखी कविता


#कुसुम लखेड़ा

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