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और फिर तुम मिल गए !

Deependra Kr.Deependra Kr. October 26, 2021
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किसी के इंतजार में था
और फिर तुम आ गए 
किसी के प्रेम में था 
और फिर तुम मिल गए ।।
ऐसा लगा जैसे हम पहले भी मिल चुके हैं
बात पहले से ही हो चुकी थी मिलने की 
ऐसा लगा जैसे कि 
जीवन के एक अध्याय को पूर्ण कर 
एक नए अध्याय की शुरूआत हुई है तुम्हारे मिलने से 
किसी के इन्तजार में था 
और फिर तुम आ गए ।।
जब तुमसे पहली बार मिला तो लगा 
कि मैं अभी लेट नहीं हुआ हूं 
ऐसा लगा कि मेरा इन्तजार 
शायद बेक़ार न गया 
वो पल जो गुजारे हैं मैने एक टक खुली आखों से 
आज उनके फलस्वरुप तुम मुझे वापस मिले हो 
वहीं मिले हो जहाँ से बिछड़े थे 
या जहाँ पर मिलने की बात हुई थी 
किसी का इन्तजार था 
और तुम आ गए ।।
हाँ,ये सच है 
कि तुम वो नहीं हो 
जिसके इन्तजार में मैं था 
पर मेरे बरसने का समय आ गया था 
इसलिए शायद तुम पर बरस गया 
वैसे तुम भी हिमालय की तरह स्थिर होकर 
आने वाले बादल को रोककर बरसात के लिए प्रेरित करते हो 
वैसे किसी का इन्तजार था मुझे 
और भाग्यवश तुम मिल गए ।।
तुम मिल गए
गुलशन के सारे गुल खिल गए  
मिट गए वो सारे अन्धेरे 
उम्मीद की किरणें विखर गईं ।।

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