ये तेरी आंखे नहीं, ये मेरा आईना's image
Poetry1 min read

ये तेरी आंखे नहीं, ये मेरा आईना

शिव कुमार खरवारशिव कुमार खरवार October 31, 2022
Share0 Bookmarks 29 Reads1 Likes
ये तेरी आंखे नहीं, ये मेरा आईना 
ये तेरी आंखे नहीं, ये मेरा आईना है
जिससे खुद को रूबरूह होने से रोक नही पाता हूँ 
तू कही दूर खड़ी होके मुस्कुराती है
और मैं तेरी मुस्कुराहट को ही देख खुश हो जाताहूँ।।
दिले हालात कैसे कहें तुमसे
जो तूम पास आती हो तो मैं घबरा सा जाता हूँ 
मुक़द्दरे  हाल क्या होगा मेरी मुहब्बत का
तूम मिलोगे तो ठीक ना सोच के ही थर्रा जाता हूँ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts