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फिर तेरी तस्वीर

Kumar UnnayanKumar Unnayan October 13, 2021
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कुछ इस तरह से, जिंदगी को पिरोए है हमनें
खुली आँखों को, कई सपन दिखाएं है हमनें

मन के अँधेरों में, वो रौशनी बन के आई
बरसों से जिसको, पलकों पर सजाएं है हमनें

वो आखिरी चराग भी, कमबख्त कौन बुझा गया
सदियों जो जिसको, ज़माने से छुपाएं है हमनें

और तुम आओ या न आओ तुम्हारी मर्ज़ी
फिर तेरी तस्वीर, कमरे में लगाएं है हमनें

- कुमार उन्नयन


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