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UAE PoetryPoetry1 min read

ये दुनिया है समझना पड़ता है।

K.S SiddiquiK.S Siddiqui November 18, 2021
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ये दुनिया है समझना पड़ता है

जख्म छुपाकर मुस्कुराना पड़ता हैं


चोट जब लख्ते जिगर देते हैं

ठोकरें खा कर संभलना पड़ता है


ये आंसू गिर पड़ा ज़मीन पर तो क्या

हुआ पानी की तरह बहाना पड़ता है


इन हवावों की जिद है बेघर करना

हमे इन आंधियों से घर बचाना पड़ता है


हर रोज़ चांद को निकालने के लिए

हमे शम्स से लड़ के डुबोना पड़ता है

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