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चार पंक्तियां

कार्तिकेयकार्तिकेय May 2, 2022
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अंजाम तो छोड़िए देखिए हम कैसे आगाज़ करते हैं,

हम अपनी ऊंची परवाज़ करते है।

फर्क सिर्फ हैसियत का है ,

अच्छी हो तो सब नाज़ करते हैं।

वरना सब नज़र अंदाज़ करते हैं।।

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