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नाही छूए कोई नाही देखे तुझे...

Krishna Kant TenguriaKrishna Kant Tenguria November 19, 2021
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नाही छूए कोई नाही देखे तुझे, 
तेरी हर-इक कहानी मेरे संग हो |

तुझसे मिलने की करता रहूँ कोशिशें, 
हम दोनों का बस-इक यही ढंग हो |
आँखों की दीद से एक हो जायें हम, 
फिर तेरे रंग मैं तू मेरे रंग हो |

नाही छूए कोई नाही देखे तुझे..... 

मिलें सातो जनम एक-दूजे को हम, 
नहीं मिलना हमारा कभी भंग हो |
कभी ना हो खतम ये सिलसिला, 
नाही इस प्यार का ही कभी अंत हो |

नाही छूए कोई ना ही देखे तुझे..... 

तेरी यादें बिछी वक्त की सेज पर, 
गर्म साँसें इन्हें गुनगुनाती रहें |
उठना चाहूँ मगर वो अदायें तेरी, 
दे दे थपकी मुझे सहलाती रहें |

नाही छूए कोई ना ही देखे तुझे.....

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