लाचार-ए-इश्क़...'s image
Share0 Bookmarks 21 Reads0 Likes

करलूँ कितनी बात पर अधूरी ही रहती,
जाने क्यूँ ये हसरत दिल की पूरी नहीं होती |
ताउम्र मौहब्बत की सौगंध दे तो दूँ उसको ,
पर लाचार-ए-इश्क़ में कोई मंजूरी नहीं होती |

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts