अकेलापन और भाव's image
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भरी दोपहरी में हुई है रात काली क्या करूँ |
सूने कोने में बैठा हूँ सोचता हूँ क्या करूँ |
दिल बुद्धि और मन पर छाई उदासी क्या करूँ |
कल अँधेरे में दिखता आज फिर में क्या करूँ |
है शोरगुल चारों तरफ ये मन अकेला क्या करे |
भरे तूफाँ की आँख में है ये खामोशी क्या करूँ|

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