मैं और तुम एक से's image
Poetry1 min read

मैं और तुम एक से

Kishan Lal RohillaKishan Lal Rohilla February 20, 2022
Share0 Bookmarks 31 Reads0 Likes

घमंडियों के बीच रहता हूं

तुम भी तो रहते हो ।।


अपमान सहता रहता हूं

तुम भी तो सहते रहते हो ।।


उपेक्षित होता रहता हूं

तुम भी तो होते रहते हो ।।


प्रेरित होता रहता हूं

तुम भी तो होते रहते हो।।


कर्मठ होता रहता हूं

तुम भी तो होते रहते हो।।


मैं और तुम हैं एक से,

हमारे अनुभव एक से।।


अगर मुझे और तुम्हें,

परखने वाले एक से ।।



© किशन लाल रोहिल्ला

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts