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Romantic PoetryPoetry1 min read

उम्मीद-ए-यार में

Kiran K.Kiran K. October 22, 2021
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माना सफ़र कठिन है बहुत संग-ज़ार में
लेकिन निकल पड़ी हूँ मैं उम्मीद-ए-यार में

-किरण के.

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