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Romantic PoetryPoetry1 min read

उलझ जाती हूँ अक्सर

Kiran K.Kiran K. October 28, 2021
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उलझ जाती हूँ अक्सर आईने से मैं तक़ाबुल में
जो ख़ुद को देखती हूँ,अक्स तेरा ही उभरता है

-किरण के.

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