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तुम्हारी नज़्मों के टुकड़े

Kiran K.Kiran K. October 29, 2021
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तुम्हारी नज़्मों के टुकड़े
अपने हाथ से छू ने की कोशिश में
अपनी पोरों को जला लिया मैंने
अमृता ने सच ही लिखा है
कि तुम एक टूटा हुआ तारा थी
सारा शगुफ्ता..
दिमागी अमराज़ के अस्पताल में
तुम्हारी चार बार खुद-खुशी की
नाकाम कोशिश
और फिर रेल के नीचे आकर
तुम्हारी खुद-ख़ुशी !!
अज़्ज़ियत के तुम्हारे हर एहसास पर
कई ड्रामा, सीरियल्स और किताबें
लिखी गई हैं
मैंने भी सोचा था,
तुमपर एक कहानी लिखूँ
लेकिन मैं किसी सारा को
खुद-खुशी की कोशिश करते
या ट्रेन से मरते नही देखना चाहती
कहानी में भी नही...

-किरण के.

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