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Romantic PoetryPoetry1 min read

तुम्हारे एहसासात की खनक

Kiran K.Kiran K. October 31, 2021
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गीता के पावन श्लोक और

क़ुरआन की मुक़द्दस 

आयतों की तरह..

तुम्हारा हर लफ़्ज़ अपनी

पलकों पर रखा मैंने,

तुम्हारे जाने के बाद 

उन सारे लफ़्ज़ों की 

मैंने नज़्में बना ली..

तुम्हारे लम्स के

एहसासात की खनक

अब नज़्में बन मेरी साँसों में

खनकती है..!


किरण के. ✍

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