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घण्टो तकती रहती हूँ..

Kiran K.Kiran K. November 4, 2021
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घण्टो तकती रहती हूँ मैं
तुम्हारे अधखुले नयनों को
और सोचती रहती हूँ,
क्या ये वही शांति है..?
जिसे पाने के लिए तुम
घर छोड़कर गए थे
और मुझे बस तुम्हे
देखने भर से मिल रही है
ना..इतना आसान भी नही
सारी इच्छाओं को त्यागकर
पाया है तुमने इसे..
लेकिन कुछ तो मैंने भी
खोया होगा ना तथागत
जो तुम्हें पा लिया है
पंचशील के सूरत में तुम
कोई ख़ामोश सी सदा बने
साथ रहते हो हरपल..!!

-किरण के.

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