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ग़ज़ल मेरी ये किसने ज़ख़्म पर बाँधी है

Kiran K.Kiran K. November 18, 2021
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ग़ज़ल मेरी ये किसने ज़ख़्म पर बाँधी है अपने
मेरे अलफ़ाज़ किसके वास्ते मरहम हुए हैं..!!

किरण के. ✍

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