चश्म-ए-तर का मुताल'अ's image
Poetry1 min read

चश्म-ए-तर का मुताल'अ

Kiran K.Kiran K. September 9, 2021
Share0 Bookmarks 5 Reads1 Likes

मुताल'अ कीजिए साहिब मिरी इस चश्म-ए-तर का भी

के लफ़्ज़ों में बयाँ हो ना सकेगी दास्ताँ मेरी


किरण के. ✍

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts