Pattharon Se Dostana Kya Hua's image
Share0 Bookmarks 8 Reads0 Likes

पत्थरों से दोस्ताना क्या हुआ

आज तक है आइना टूटा हुआ


देर से सूरज जो है डूबा हुआ

है अंधेरा हर तरफ छाया हुआ


ऊँची-ऊँची चिमनियों में आज भी

देखता हूँ मैं लहू जलता हुआ


तेरी परवाज़ें बहुत महदूद हैं

आसमाँ है दूर तक फैला हुआ


क्यों दयार-ए-फ़िक्र में है तीरगी

क्या ग़ज़ल का 'मीर' है सोया हुआ


उस को अपनी आन ठुकराना पड़ी

मैं बड़ी मुश्किल से दीवाना हुआ


आँधियों के ज़द में वो भी आ गया

जो दिया था ताक़ पर जलता हुआ

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts