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समभाव में चलना होगा

Kavya SafarKavya Safar January 15, 2022
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भौतिकता के आकुल युग में

व्याकुल मन को क्या-क्या समझाएंँ?

समृद्धि केन्द्र जब 'स्वयं ' बना हो

किस मुख से सामूहिकता का उपदेश सुनाएँ?

उन्नति की परिभाषा जब केवल अपना घर हो

फ़िर किस अँगुली पर औरों के दोष गिनाएँ?


तो क्या दोष युक्त ही नियति हमारी?

क्या यही प्रचलन जीवन की लाचारी?

संकुचित दृष्टि क्या प्रारब्ध बना अब?

क्या अवगुण ही सद्गुण पर भारी?


पर ज्ञात ज्ञान फ़िर भी यह कहता है-

मानव प्रवृत्ति के ये आवृत्ति गुण हैं,

समय काल के विदित अनुगुण हैं।

हम मानव हैं श्रेष्ठ जीव तो

समभाव में चलना होगा,

विकृति के कलुषित भावों से

सतत,निरंतर लड़ना होगा।


संकीर्ण सोच के जाल तोड़कर,

आहत मन को साथ जोड़कर,

सर्वहित साधित वैचारिक प्रकाश में

अपने जीवन को गढ़ना होगा,

समभाव में चलना होगा।।

~राजीव नयन

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