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पुराने यारों का आ जाना....

Kavya SafarKavya Safar October 26, 2022
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आज मेरी

उस अकेली कोठरी के दरवाज़े का

दो-चार,पांँच बार खटखटाना,

धीमी रोशनी का थोड़ा तेज हो जाना,

किताबों को

जाने-अनजाने हथेलियों का सहलाना,

दीवारों के अलावे,पुराने यारों का आ जाना।


खैर, नहीं भी आते यार मेरे,तो भी

कोठरी की दीवारें मुझे सुनती ही!

चाहे या न चाहे;

मेरे स्वर की तरंगों को ढूंढ़ती ही!

पर चलो आज

चाय और कोठरी की दीवारों को

पुरानी संगत मिलेगी,

बहुत दिनों बाद नये अंदाज में

वही पुरानी बैठक सजेगी।।

~राजीव नयन

 



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