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Krishna JanmashtamiPoetry1 min read

कृष्ण को पुकार लो

Kavya SafarKavya Safar August 19, 2022
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जीत क्या है?हार क्या है?

कर्म को स्वीकार लो,

प्रेम ही निदान है

कृष्ण को पुकार लो।


दर्द का भी गहरा है ज़िंदगी से वास्ता,

तपती धरा मिले या हिम का हो रास्ता,

छल रहा हो ज़िन्दगी,दूर चाहे हो खुशी

घृणा के चरम को मस्तक से उतार लो,

प्रेम ही निदान है

कृष्ण को पुकार लो।


किस जोड़ में जुड़े हो तुम

किस भाग में तुम शेष हो,

ये सोचना तुम छोड़ दो

कि तुम कितने विशेष हो,

भ्रम के भंवर में चाहे दिखता अनेक है,

पर,गुणनखंड के गुणा का प्राप्त मूल एक है,

अधैर्य के द्वंद को धैर्य से संवार लो,

प्रेम ही निदान है

कृष्ण को पुकार लो।


~राजीव नयन




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