कहते हो!'s image
Share0 Bookmarks 40 Reads0 Likes


बहते पानी को हथेली से रोक कर

कहते हो- पानी को पहचानता हूँ!

हृदय में पत्थर सजाकर

कहते हो- दिल से मानता हूँ!

ज़िन्दगी रोज़ सिखाती है,औ॑

कहते हो- सब कुछ जानता हूँ!

~राजीव नयन


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts