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जरा-सी सुध ले लो शहर की

Kavya SafarKavya Safar June 29, 2021
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जरा-सी सुध ले लो शहर की

क्यों बेसुध पड़े हो ?

इतना कोलाहल है, फिर भी

क्यों इस कदर अड़े हो?

कभी-कभी तो लगता है ये अचरज कि

आईने के सामने,कैसे बुत बने खड़े हो?

~राजीव नयन

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