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Diwali PoetryPoetry1 min read

दीप जले और रौशन हो

Kavya SafarKavya Safar November 4, 2021
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दीप जले और रौशन हो
जग का हर घर और हर आंँगन,
उन सबको इच्छित उत्कर्ष मिले
प्रयास हो जिनका निश्छल पावन।

रंगोली से घर को सजाना,
पूजन की हर विधि निभाना,
पर दिखे अंँधेरा अगर कहीं तो
दीप वहाँ भी जला कर आना,
बस इतनी कृपा कर देना 'माँ'
ख़ाली न रह जाए कोई दामन,
उन सबको इच्छित उत्कर्ष मिले
प्रयास हो जिनका निश्छल पावन।।
~राजीव नयन

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