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बहुत दिन हुए देखे ये शहर!

Kavya SafarKavya Safar March 6, 2022
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अपनी चौखट,अपना घर

अपना आँगन,अपना डर

रोज़ दौड़ना है,

मुश्किल से जोड़ना है,

न जाने कितने

पत्थरों को तोड़ना है?

सुकून के पल

आज या शायद कल!

न जाने कब,कैसे

गुजरता है,कौन-सा पहर!

रहता हूँ यहीं,पर

बहुत दिन हुए देखे ये शहर!

अपनी चौखट,अपना घर

अपना आँगन,अपना डर ।।

~राजीव नयन


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