वो चल रहा है -  इमरान प्रतापगढ़ी's image
IndiaPoetry2 min read

वो चल रहा है - इमरान प्रतापगढ़ी

KavishalaKavishala November 10, 2022
Share0 Bookmarks 294 Reads1 Likes

[वो चल रहा है]


उदास मौसम बदल रहा है

धुएँ का पर्वत पिघल रहा है

दिलों में लावा उबल रहा है

सुबह सुबह जब हुजूम लेकर,

सफ़र पे निकले तो यूँ लगे है

कि जैसे सूरज निकल रहा है।


वो चल रहा है....


वो कह रहा है कि नफ़रतों से जो दिल हैं टूटे,

सभी दिलों को मैं जोड़ दूँगा,

वो कह रहा है हर एक दरिया हर एक तूफ़ॉं

को मोड़ दूँगा।

सुनो सितमगर न समझो डरकर

मैं अपने लोगों को छोड़ दूँगा।

सितम की गर्दन मरोड़ दूँगा


सितमगरों की हर एक ख़्वाहिश

हर एक साज़िश कुचल रहा है।


वो चल रहा है ......


ज़माने भर की तमाम माँओं,

तमाम बहनों ने हाथ उठाकर दुआएं दी हैं,

तमाम बच्चों ने इस तपस्वी का माथा चूमा, बलाएँ ली हैं।

हर इक को अपने गले लगाता,

वो अपनी धुन में ही गुनगुनाता।


ज़माने भर में जो नफ़रतों का ज़हर भरा है।

वो बन के शंकर हर इक ज़हर को निगल रहा है।


वो चल रहा है.....


मुहब्बतों की किताब लेकर।

लबों पे अपने गुलाब लेकर।

सुनहरे रंगों का ख़्वाब लेकर।

वो आया है इंक़लाब लेकर।


बलाएँ रस्ता बदल रही हैं।

फ़ज़ाएँ ख़ुश्बू में ढल रही हैं।


ये नफ़रतों का निज़ाम बदले।

हिकारतों का कलाम बदले।

अगर ये रहबर नहीं बदलते,

तो इस वतन में ख़ुशी की ख़ातिर

अब अपना लहजा अवाम बदले।


अंधेरे बेचैन दिख रहे हैं।

कोई है जो इस अँधेरी शब में,

मशाल की तरह जल रहा है।


वो चल रहा है ......


- इमरान प्रतापगढ़ी

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts