तब समझूँगा आया वसंत  -  शिवमंगल सिंह सुमन's image
HoliPoetry1 min read

तब समझूँगा आया वसंत - शिवमंगल सिंह सुमन

KavishalaKavishala March 17, 2022
Share0 Bookmarks 22 Reads0 Likes

जब सजी बसंती बाने में

बहनें जौहर गाती होंगी

क़ातिल की तोपें उधर

इधर नवयुवकों की छाती होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब पतझड़ पत्तों-सी विनष्ट

बलिदानों की टोली होगी

जब नव विकसित कोंपल कर में

कुंकुम होगा, रोली होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

युग-युग से पीड़ित मानवता

सुख की साँसे भरती होगी

जब अपने होंगे वन उपवन

जग अपनी यह धरती होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब विश्व-प्रेम मतवालों के

ख़ूँ से पथ पर लाली होगी

जब रक्त बिंदुओं से सिंचित

उपवन में हरियाली होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब सब बंधन कट जाएँगे

परवशता की होली होगी

अनुराग अबीर बिखेर रही

माँ बहनों की झोली होगी

तब समझूँगा आया वसंत। 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts