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मज़दूर दिवस | शायरी

KavishalaKavishala June 16, 2020
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लोगों ने आराम किया और छुट्टी पूरी की 

यकुम मई को भी मज़दूरों ने मज़दूरी की 

- अफ़ज़ल ख़ान

 

ये बात ज़माना याद रखे मज़दूर हैं हम मजबूर नहीं I

ये भूख ग़रीबी बदहाली हरगिज़ हमको मँज़ूर नहीं ।।

- कांतिमोहन 'सोज़'

 

कुचल कुचल के न फ़ुटपाथ को चलो इतना

यहाँ पे रात को मज़दूर ख़्वाब देखते हैं

- अहमद सलमान

 

सो जाता है फुटपाथ पे अख़बार बिछाकर,

मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाता

-मुनव्वर राना

 

मिल मालिक के कुत्ते भी चर्बीले हैं,

लेकिन मजदूरों के चेहरे पीले हैं

- तनवीर सिप्रा

 

आने वाले जाने वाले के लिए,

आदमी मजदूर हैं राहें बनाने के लिए

- हफ़ीज जालंधरी

 

बुलाते हैं हमें मेहनत-कशों के हाथ के छाले

चलो मुहताज के मुँह में निवाला रख दिया जाए

- रज़ा मौरान्वी

 

अगर इस जहां में मजदूर का नामोंनिशां न होता

फिर न होता हवामहल और नही ताजमहल होता

 

साधन नहीं है कोई भी, भरने हैं कई पेट

इक टोकरी है, सर है कि मज़दूर दिवस है

- ओम प्रकाश यती

 

 

बेचता यूं ही नहीं है आदमी ईमान को,

भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को ।

- अदम गोण्डवी

 

होने दो चराग़ाँ महलों में क्या हम को अगर दीवाली है 

मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम मज़दूर की दुनिया काली है 

 

- जमील मज़हरी

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