Couplets By Ayushmann Khurrana's image
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देश का हर जवान बहुत ख़ास है,

है लड़ता जब तक श्वास है,

परिवारों के सुखों का कारावास है,

शहीदों की माओं का अनंत उपवास है,

उनके बच्चों को कहते सुना है -

पापा अभी भी हमारे पास हैं!

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कुछ पल के लिए पूरा आऊं?

या हर पल में अधूरा आऊं?

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अज्ञात से सवाल का

अज्ञात सा जवाब है

अज्ञात सी मेरी नींद में

अज्ञात सा इक ख़्वाब है

अज्ञात से महासागर में

अज्ञात सा ही आब है

मेरी हैसियत कुछ भी नहीं

कोई अज्ञात ही लाजवाब है।

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सब कुछ सोच कर आता है वो,

मुझसे मिलना भी और अलविदा भी!

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ख़ामोशियों का मज़ा अलग है,

कह कर बात बिगाड़ो मत!

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रहने दे यह वहम मुझको,

की तू सिर्फ और सिर्फ मेरा ही है!

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अच्छा किरदार निभाया है मेरे इश्क़ में ना रहने का,

अब चलो औक़ात पे वापस आ जाओ!

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रोज़, हर वक़्त यही सोचता हूँ मैं,

की अपनी ही नक़ल करने में मात खा रहा हूँ मैं!

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दिमाग़ से मोहब्बत करनी छोड़ दो,

तुम वैसे भी गणित में फ़ेल हुआ करते थे!

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कभी मेरी अदा पे हुई तवज्जह,

कभी लगी उसे मेरे जिस्म की लत...

और जब हुई तो हुई उसे मेरे बचपने से मोहब्बत!

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अपने अल्फ़ाजों के बीच कभी मैं साहिर कभी पाश में हूँ..

मैं तुम्हारे होठों के बीच कहीं सुकून की तलाश में हूँ।

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माँ ने आज चंडीगढ़ से मट्ठी और आम का अचार भिजवाया दिया!

ख़ुद नहीं आईं, पर अपने क़रीब होने का स्वाद करा दिया !!

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ठण्डी हवा, तेज़ हवा

काली हवा, अंग्रेज़ हवा,

तिब्बत का भूकम्प थी चीनी हवा,

कश्मीर में फिरती है असमंजस की भीनी हवा !

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तुम्हें देने के लिए हैं सिर्फ़ अल्फ़ाज़ मेरे पास,

जो लिखे हैं मैंने कई ज़िंदगीयाँ जी कर.

तुम्हें भी अगर जी लूँ तो यह किताब मुकम्मल हो!

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इकरार करने से पहले वाला प्यार,

और पहली लड़ाई के बाद वाला प्यार,

कभी वापस नहीं आता!

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जिस अख़बार में आज मेरा नाम है,

कल उसमें वड़ा पाओ परोसा जाएगा.

एक बार फिर वक़्त की बदलती आदत को भरपूर कोसा जाएगा।

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जज़्बातों का भी तो इतवार होना चाहिये!

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तुम्हारी आँखों की ज़ुबान उर्दू ही है शायद.

पढ़ने में मुझे दिक़्क़त है,

और बयान ना करना तुम्हारी फ़ितरत है।

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इतना भी मुझ जैसा ना बन, की तुझसे नफ़रत हो जाए!

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रौशन रहता है यह शहर कुछ ख़ास तरीक़े से,

यहाँ चिराग़ों से ज़्यादा दिल जलते हैं! 

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तेरी फ़ितरत है सूरज की,

ना जाना तूने कभी मेरे अंधेरे को !

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देखा ना कभी ख़ुद को जी भर के,

आइना किसी और की तस्वीर दिखाता रहा!

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सबको ख़ुश रखने की चाहत में हम अपनी चाहत भूल गए,

सबका मानो अवकाश था, हम अकेले ही स्कूल गए !

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कुछ दूर साथ चलो, उस मोड़ तक ही।

जब वो मोड़ आएगा तो मैं बताऊँगा नहीं।

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  1. Alvida Toh Sirf Lafzon Se Hi Kaha Tha Humne.
  2. Mohabbat Mein Itminaan Rakhna, Jism Se Pehle Jaan Rakhna.
  3. Zamaane Mein Tanhaaiyon Ka Aalam Toh Dekhiye, Hum Khud Ko Taakte Hain, Le Le Ke Selfiyaan.
  4. Safalta Ki Oonchai Par Ho Toh Dheeraj Rakhna, Pakshi Bhi Jaante Hain Ki Aakaash Mein Baithne Ki Jagah Nahin Hoti.
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  12. Bachpan Mein Papa Ki Lagayi Bandishon Ko Todne Mein Bahut Mazaa Aata Tha, Ab Badey Ho Kar Khud Par Lagayi Bandishein Todi Nahi Jaati.
  13. Zikr Tera Har Lafz Mein Karoonga, Fikr Na Kar, Tera Naam Na Loonga.
  14. Tumse Milne Ke Baad Jo Mere Dil Ke Alfaaz Keh Rahe Hote Hain, Woh Mere Likhe Huye Alfaazon Se Bhi Gehre Hote Hain.




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