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ॐ नमस्ते गणपतये।

त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि।

त्वमेव केवलं कर्ताऽसि।

त्वमेव केवलं धर्ताऽसि।

त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।

त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।

त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥

English Translation: Aum, I offer a salutation to that one, to Ganapati. You are, verily, the prime principle. You are verily the unswerving (direct or straight) creator and the upholder. You are verily the unswerving destroyer. You are verily this assuredly absolute Brahman. You are verily the eternal self.

हे! गणेशा आप को प्रणाम।

आप ही प्रत्यक्ष तत्त्व हो।

आप ही केवल कर्ता हो।

आप ही केवल धर्ता हो।

आप ही केवल हर्ता (दुख हरण करनेवाले) हो।

निश्चयपूर्वक आप ही इन सब रूपों में विराजमान ब्रह्म हो।

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ऋतं वच्मि।

सत्यं वच्मि॥


मैं ऋत (न्यायसंगत बात) कहता हूँ,

सत्य कहता हूँ।

English Translation: I speak of the cosmic law, I speak of the absolute reality.

आप साक्षात नित्य आत्मस्वरूप हो।

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अव त्वं माम्।

अव वक्तारम्।

अव श्रोतारम्।

अव दातारम्।

अव धातारम्।

अवानूचानमव शिष्यम्।

अव पश्चात्तात्।

अव पुरस्तात्।

अवोत्तरात्तात्।

अव दक्षिणात्तात्।

अव चोर्ध्वात्तात्।

अवाधरात्तात्। सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात्॥

English Translation: Protect me, protect the speaker, protect the listener, protect the giver, protect the sustainer, protect the teacher, protect the disciple. Protect from the back, protect from the front, protect from the north, protect from the south, protect from above, protect from below. Protect me from all the sides.

आप मेरी रक्षा करो, आप वक्ता (बोलने वाले) की रक्षा करो, आप श्रोता (सुनने वाली) की रक्षा करो, आप दाता की रक्षा करो, आप धाता की रक्षा करो, आप आचार्य की रक्षा करो, शिष्य की रक्षा करो। आप आगे से रक्षा करो, पीछे से रक्षा करो, पूर्व से रक्षा करो, पश्चिम से रक्षा करो, उत्तर दिशा से रक्षा करो, दक्षिण से रक्षा करो। आप ऊपर से रक्षा करो, नीचे से रक्षा करो। आप सब ओर से मेरी रक्षा करो।

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त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः।

त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः।

त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि।

त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।

त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि॥

English Translation: You are the very nature of the words. You are the nature of consciousness. You are the nature of bliss. You are the nature of the Brahman. You are none other than the Real existence-consciousness-bliss. You are the one without the second (the only one). You are the visible Brahman. You are the nature of spiritual knowledge (and) you are science.

आप वाङ्मय हो, आप चिन्मय हो, आप आनंदमय हो, आप ब्रह्ममय हो, आप सच्चिदानन्द और अद्वितीय (जिसके आलावा कोई दूसरा नहीं) हो। आप ज्ञानमय हो, विज्ञानमय हो। आप प्रत्यक्ष कर्ता हो आप ही ब्रह्म हो।

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सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।

सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।

सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।

सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।

त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः।

त्वं चत्वारि वाक् पदानि॥

English Translation: All this world is manifested from you. All this world is sustained by you. This entire world dissolves in you. This entire world reverts back to you. You are the earth, water, wind, fire, and space. You are the four types of speech (parā, paśyantī, madhyamā, vaikharī).

सारा जगत आप से उत्पन्न होता है, सारा जगत आप से सुरक्षित रहता है, सारा जगत आप में लीन रहता है, सारा जगत आप ही में प्रतीत होता है । आप ही भूमि, जल, आकाश और अग्नि हो। आप चार प्रकार की वाणी हो (परा, पश्यन्ती, मध्यमा, वैखरी)।

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त्वं गुणत्रयातीतः।

त्वं अवस्थात्रयातीतः।

त्वं देहत्रयातीतः।

त्वं कालत्रयातीतः।

त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्।

त्वं शक्तित्रयात्मकः।

त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम्।

त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्म भूर्भुवस्सुवरोम्॥

English Translation: You transcend three attributes (sattva, rajas and tamas). You transcend three states of the body (waking, dreaming and sleeping). You transcend the three bodies (gross, subtle and causal). You are beyond the three periods of time (Past, present and future) . You are the eternal one who abides as the foundation. You are the trinity of power (will power, power of action and power of knowledge). You are the one of whom the ascetics meditate upon. You are Brahma, you are Vishnu, you are Rudra, you are Indra, you are Fire, you are the Wind, you are the Sun, you are the Moon. You are effulgence as the earth, the mid-region, and space above.

तुम तीनों गुणों (सत्त्व, राज, तम) से परे हो। तुम तीनों अवस्थाओं (जागृत, स्वप्ना, सुषुप्ति) से परे हो। तुम तीनों देह (स्थूल, सूक्ष्म और कारण) से परे हो। तुम तीनों काल (भूत, वर्तमान, भविष्य) हो। तुम मूलाधार चक्र में स्थित हो। तीनों शक्तियों (संकल्प शक्ति, उत्साह शक्ति और ज्ञान शक्ति) में तुम ही हो। सभी योगी नित्य तुम्हारा ध्यान करते हैं। तुम ब्रह्मा, विष्णु, और रूद्र हो। तुम इंद्रा हो, तुम अग्नि हो, तुम वायु हो, तुम सूर्या हो, तुम्ही चंद्र हो। तुम ही ब्रह्म और तुम ही त्रिपाद भू, भुवः और स्वः हो।

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गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादींस्तदनन्तरम्।

अनुस्वारः परतरः।

अर्धेन्दुलसितम्।

तारेण ऋद्धम् ।

एतत्तव मनुस्वरूपम्।

गकारः पूर्वरूपम्।

अकारो मध्यरूपम्।

अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्।

बिन्दुरुत्तररूपम्।

नादः सन्धानम्।

संहिता संधिः।

सैषा गणेशविद्या।

गणक ऋषिः।

निचृद्गायत्रीच्छन्दः।

गणपतिर्देवता।

ॐ गं गणपतये नमः॥

English Translation: Pronouncing the syllabus ग (ga) in the beginning and other syllables thereafter, the sibilant is marked with half-moon transcending, mature with stars. Thus is your form. The ग (ga) is the prior form, अ (a) is the later form, sibilant is the final form, the dot is the supreme form. The sound is the connecting link, the hymn is the connection. (this makes the "ॐ गँ" ) ‘Gakāra’ (ग्) is the first part. ‘Akāra’ (अ) is the middle part. And the Anusvāra (nasal sound) is the last part and the ‘bindu’ (dot) is the latter form of pronunciation. These all joined together as the sound of the mantra (ॐ गँ). This, verily, is the wisdom of Gaṇeśa. Gaṇaka is the seer, Gāyatrī is the metre, Gaṇapati is the deity. Aum, obeisance to Gaṇapatī as ‘gam’. My reverential salutations to Gaṇapati.

'गण' के प्रथम शब्दांश (ग) का उच्चारण करने के बाद प्रथम वर्ण (अ) का उच्चारण करें, उसके बाद अनुस्वार (म्) का उच्चारण करें (जिससे 'गम्' बनता है), इसके बाद इसे अधचन्द्र से सुशोभित करें (गँ) और तार से इसे बाधाएँ (इस प्रकार "ॐ गँ" बनता है)। ग-कार प्रथम रूप है, अ-कार मध्य रूप है और अनुस्वार अनिम रूप है। बिंदु उत्तर (ऊपरी) रूप है । अंत में नाद का संधान (योग) होता है, ये सभी आपस में मिल जाते हैं ("ॐ गँ" ये रूप बनता है )। यह गणेश विद्या है, गणक इसके ऋषि हैं, निचृद-गायत्री छन्द है, गणपति देवता है, ॐ गँ गणपतये नमः।

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एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।

तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

English Translation: We know the single-tusked one; we meditate on the one with a curved trunk. May he awaken us (to the ultimate truth).

हम एकदन्त को जानते हैं; वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वह दन्ती (हाथीदाँत वाला) हमें जागृत करे।

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एकदन्तं चतुर्हस्तं पाशमङ्कुशधारिणम्। रदं च वरदं हस्तैर्बिभ्राणं मूषकध्वजम्॥

रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्। रक्तगन्धानुलिप्ताङ्गं रक्तपुष्पैस्सुपूजितम्॥

भक्तानुकम्पिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।

आविर्भूतं च सृष्ट्यादौ प्रकृतेः पुरुषात्परम्।

एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वरः॥

English Translation: (The visible form of Gaṇapatī is as follows) his face has a single tusk; he has four hands; (and) with two hands, he is holding noose (pāśa) and goad (aṅkuśa), with his third hand he is holding a tusk (rada), and with fourth hand he is showing the gesture of boon-giving (varada-mudrā); his flag is having the emblem of a rat (mūṣaka). His form is having a beautiful reddish glow, with a large belly (lambodara) and with large ears like fans (śūrpakarṇa); he is wearing red garments. His Form is anointed with red fragrant paste, and he is worshipped with red flowers. He is the one who is compassionate towards his devotees, he has descended for the cause of the universe. He manifested at the beginning of the universe. He is beyond the manifested nature of the manifested world. He who meditates on him in this way everyday is the best Yogi among the Yogis.

भगवान गणेश एकदन्त चार भुजाओं वाले है जिसमे वह पाश, अंकुश, दन्त, वर मुद्रा रखते हैं। उनके ध्वज पर मूषक हैं। वे लाल रंग से तेजस्वी हैं, लम्बोदर हैं, हैं लाल वस्त्र धारी हैं। रक्त चन्दन का लेप लगा है। वे लाल पुष्प धारण करते हैं। भक्तो के लिये अनुकम्पा रखते हैं जगत में सभी जगह व्याप्त हैं। श्रृष्टि के रचियता हैं। वह प्रकृति और पुरुष से भी पहले आविर्भूत हुए हैं और अच्युत हैं। जो इनका ध्यान सच्चे हृदय से करते हैं वे महा योगी हैं।

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नमो व्रातपतये।

नमो गणपतये।

नमः प्रमथपतये।

नमस्तेऽस्तु लम्बोदरायैकदन्ताय विघ्ननाशिने शिवसुताय वरदमूर्तये नमः॥

English Translation: Salutations to the Lord of all human beings, salutations to the Lord of all soldiers, salutations to the Lord of all sages, salutations to you, the one with a large belly and a single tusk, salutations to the son of Lord Śiva who is the remover of all obstacles and the bestower of boons.

व्रातपति, गणपति को प्रणाम, प्रथम पति को प्रणाम, एकदंत को प्रणाम, विध्नविनाशक, लम्बोदर, शिवतनय श्री वरद मूर्ती को प्रणाम।

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गणनायकाय गणदैवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।

गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि।

गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि।

एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि।

English Translation: The leader, god, and chief of the gaṇas. The embodiment, adornment, and master of the guṇas, and one who is beyond the guṇas. The one with one tusk, and a curved trunk, the son of Gaurī (Pārvati), we meditate upon you.

हम श्री गणेश का ध्यान करते हैं, जो गणों के नायक, देवता, तथा अध्यक्ष हैं,

जो गुणों के विग्रह हैं, गुणों द्वारा मण्डित हैं, गुणों के अधीश हैं, और गुणों के परे हैं।

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त्वं गुणत्रयातीतः।

त्वमवस्थात्रयातीतः।

त्वं कालत्रयातीतः।

त्वं देहत्रयातीतः।

English translation: You are beyond the three qualities (sattva, rajas, tamas), beyond the three conditions (awake, sleepful, dreaming), beyond the three states of time (past present and future), and beyond the three bodies (physical, astral and causal).

आप तीनों गुणों के (सत्त्व, रजस् ,तमस्), तीनों अवस्थाओं के (जाग्रत, निद्रामय, स्वप्नमय),

तीनों काल के (भूत, भविष्य, वर्तमान), तीनों शरीरों के (स्थूल, सूक्ष्म, कारण) परे हैं।

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गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।

ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥

English translation: The leader of the Ganas, you are the wisdom of the wise and uppermost in glory. You are the foremost king of prayers (Brahmanaspati). Please come to us and be present in the seat of this sacred altar (to charge our prayers with your wisdom), we offer our sacrificial oblations to you.

हे गणों के स्वामी हम आप का हवन करते है। क्रान्तदर्शियों (कवियों)

में श्रेष्ठ कवि और सभीसे तेजस्वी है। मंत्रों के राजा, मंत्रों मे अग्रीम है।

हम आपका आवाहन करते हैं। हमारी स्तुतियों को सुनते हुए पालनकर्ता

के रुप में आप इस सदन में आसीन हों।

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त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि॥

English translation: You are the absolute awareness. You are full of supreme wisdom and knowledge.

आप संपूर्ण जागरुकता हो। आप सर्वोच्च ज्ञान और प्रज्ञता से भरे हुए हैं।


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