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Azadi Ka Amrit MahotsavPoetry2 min read

धन्य: अस्मि भारतत्वेन

Kavishala SanskritKavishala Sanskrit August 13, 2022
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- Vishnu Purana -

रत्नाकरधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्।

ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम वन्देभारतमातम्॥


(जिनके पैर समुद्र द्वारा धोए जाते हैं और जो हिमालय से सुशोभित हैं, वह, जो कई ब्रह्मऋषियों और राजऋषियों से भरा है। ऐसी मेरी भारत माता को अभिवन्दन।)

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Salute to my mother India, whos’ feet are washed by the sea, adorned with Himalaya, she, who possess many Brahmarishis (intellectual sages) and Rajyarishis (king sages)


- Vishnu Purana -

गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे ।

स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ॥


(देवगण भी यह गान करते हैं कि जिन्होंने भारतवर्ष में जन्म लिया है, जो कि स्वर्ग और मोक्ष का मार्ग है, वे पुरुष हम देवताओं से भी अधिक धन्य हैं।)

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Even the gods sing that the men who are born in this Bhāratavarṣa, which is the path to heaven and liberation, are more fortunate than us gods.

- Vishnu Purana -


धन्य: अस्मि भारतत्वेन

(भाग्य है मेरा, मै एक भारतीय हूँ)


- Vishnu Purana Bharata Varsha 3.23 -


अत्र जन्म सहस्राणां सहस्रैरपि सत्तम।

कदाचिल्लभते जन्तुर्मानुष्यं पुण्यसञ्चयात्॥


(हजारों जन्मो के हजारों पुण्यकर्मों के संचय से यहाँ भारत भूमि पर मनुष्य जन्म प्राप्त होता है।)

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It is only after many thousand births, and the aggregation of much merit, that living beings are sometimes born in Bhárata as human.

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