Day 1 - Devi Shailaputri [Navratri]'s image
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Shailaputri (शैलपुत्री), is the daughter of the Mountain King Himavat and is a manifestation and form of the Hindu mother goddess Mahadevi, representing herself as the pure form of goddess Parvati. She is the first Navadurga venerated during the first day of Navratri and is a reincarnation of Goddess Sati.


या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित है, उस देवी के नमन है।

English translation: The goddess who is manifest in all beings as strength, we bow down to her.

[तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम्]


सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतमांशुगन्धमाल्यशोभे ।

भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥

आप कमल में रहने वाले, हाथ में कमल धारण करने वाले, सफेद वस्त्रों, सुगंधों और मालाओं से सुशोभित,

सुंदर विष्णुप्रिया और तीनों लोकों को समृद्धि देनेवाली हैं। हे देवी मुझ पर कृपा करो।

तीनों लोकों को समृद्धि देनेवाली, हे देवी, मुझ पर कृपा करो ।

English translation: You are the one who lives in the lotus, holding the lotus in your hand,

adorned with white garments, scents, and garlands,

the beautiful Vishnupriya and the one who gives prosperity to the three worlds.

O Goddess, bless me

[कनकधारा-स्तोत्रम् 18]


विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये।

अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥ 

विवाद, विषाद, प्रमाद, या प्रवास में, जल, अग्नि, अथवा पर्वत में, शत्रुओं के बीच, और जंगल में, मेरी रक्षा करो, तुम ही शरण्य हो। तुम ही रास्ता हो, एकमात्र तुम ही रास्ता हो, माँ भवानी।

English translation: During the dispute, despair, intoxication, or travelling, in water, fire, or mountains, amidst enemies, and in the forest, protect me, for you are my refuge. You are the way, the only way, Bhavani!

[Bhavānyaṣṭakam 7]


सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सभी मंगलो में मङ्गलमयी, कल्याणकारी, सभी मनोरथो को पूर्ण करने वाली,

शरणागत वत्सला, तीन नेत्रो वाली शिव की पत्नी आपको नमस्कार है।

English translation: Auspiciousness of all things auspicious! O consort of Shiva, fulfiller of all our goals!

Our only refuge! O three-eyed Gauri! O Narayani! Our salutations to you.

[Markandeya Purana, Devi Mahatyam 88.9]


आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।

नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥१०॥

जब भी मैं समस्याओं में डूबता हूँ, मैं आपका स्मरण करता हूँ। यह मेरी सच्ची भावना है, कोई झूठ नहीं।

क्योंकि, अगर कोई बालक भूखा और प्यासा हो, तो वह अपनी माता का ही स्मरण करता है।

English translation: Whenever I am sunk in difficulties in life, o Mother Durga, I remember you, an ocean of compassion. These are my true feelings for you and not falsity.

Because When children are afflicted with hunger and thirst, they naturally remember their Mother (only).

[Devyāparādha-Kṣamāpana Stotra 10]

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