सरदार उधम सिंह : मेरी जवानी का कोई मतलब बना?'s image
Movie ReviewArticle4 min read

सरदार उधम सिंह : मेरी जवानी का कोई मतलब बना?

Kavishala ReviewsKavishala Reviews October 19, 2021
Share0 Bookmarks 319 Reads1 Likes

Ideology अच्छी और सही होनी चाहिए, नहीं तो उसके बिना जो आज़ादी मिलेगी वो इस गुलामी से भी डरावनी होगी!

- भगत सिंह


निर्देशक : शूजित सिरकार

फिल्म के कलाकार : विक्की कौशल, अमोल पाराशर, बनिता संधू, शॉन स्कॉट, स्टीफन होगन, एंड्रयू हैविल, रितेश शाह… 

अवधि: 2 Hrs 42 Min

फिल्म प्लेटफार्म : Amazon Prime Video

 

समीक्षा : 

यह फिल्‍म देश की आजादी की लड़ाई के नायक सरदार उधम सिंह को एक श्रद्धांजलि है।लीड रोल में विक्की कौशल हैं।साल 1940 में क्रांतिकारी सरदार उधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ ड्वायर की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी, असल में यह घटना 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्‍याकांड का बदला था। उस नृशंस हत्‍याकांड के वक्‍त माइकल ओ ड्वायर ब्रिटिश शासन काल के पंजाब के गवर्नर थे। माइकल ड्वायर ने जलियांवाला बाग में हुई सैकड़ों लोगों की हत्‍या सही और अनुशासन के लिए जरुरी बताया था।

सरदार उधम सिंह ऐसे क्रांतिकारी की कहानी है, जो दुख और बदले की आग में जल रहे थे। महज 20 साल की उम्र में सरदार उधम ने एक बर्बर अपराध देखा, सैकड़ों लोगों की हत्‍या ने उनके अंदर बदले की भावना को इस कदर मजबूत बना दिया कि उन्‍होंने इसे 20 साल बाद तक अपने जीवन का मकसद बनाए रखा। 

फिल्म में हमें भगत सिंह के किरदार में अनमोल पाराशर दिखाए जाते है, जो की भगत सिंह के सिद्धांतो को बखूबी दर्शाते है। भगत सिंह की सहादत और उनके सिद्धांतो का उधम सिंह के जीवन जो गहरा प्रभाव पड़ा था, यह मूवी उसे बखूबी दिखती है। 

मूवी के एक सीन में जब एक ब्रिटिश जांच अध‍िकारी ने उधम सिंह से पूछा कि, "क्या तुम भगत सिंह को जानते हो ?" तब उधम सिंह बोलते है कि , "आप जब 23 साल के थे तब आप क्या कर रहे थे ? " जिसके जवाब में वह ब्रिटिश जांच अध‍िकारी बोलता है कि, “23 में मेरी शादी हुई थी और हमारा पहला बच्चा होने वाला था” फिर उद्यम सिंह कहते है कि “फिर आप भगत सिंह के बारे में बात ना करे तो बेहतर है”। 


फिल्म में जलियांवाला बाग हत्‍याकांड को बहुत बेहतरीन ढंग से दर्शाया गया।उसके बाद के हालत और उस समय के दर्द को देख के दर्शकों का दिल पसीज जाएगा। विक्की कौशाल ने अपने एक्टिंग से सबको इस कहानी में बांधे रखा है। मूवी बीच में थोड़ी धीमी हो जाती है लेकिन कहानी और एक्टिंग से मूवी को बोरिंग बिलकुल नहीं खा जा सकता। कुछ सीन्‍स में विक्‍की कौशल ने बढ़‍िया काम किया है। खासकर एक सीन में जहां वह नशे में धुत हैं। 20 साल की उम्र के किरदार में एक ब्रिटिश जांच अध‍िकारी के साथ उनकी बातचीत का सीन जबरदस्‍त है। 'मेरे जवानी का कोई मतलब बना?' यह सुनकर आपका भी दिल टूट जाता है। फिल्‍म में भगत सिंह के हिंग्लिश वाले डायलॉग्स जैसे, 'हम सिर्फ एक्‍सप्‍लॉयटेशन के अगेंस्‍ट हैं। हमें सेमी-इंडि‍पेंडेंस नहीं चाहिए।' इसे फिल्‍म की सेटिंग को देखते हुए जगह देने की कोश‍िश की गई है। 

मूवी में सरदार उधम  साहस को दिखाया गया है , जो कभी नहीं डगमगाया। इस स्वतंत्रता सेनानी ने कई महाद्वीपों की यात्रा की, कई नकली पहचान बनाए और जीवनभर छुपकर, भीड़ में गायब रहे। 

यदि आप 2021 में कोई फ़िल्म देखने की सोच रहे है तो यह फिल्म आपके लिए है, विक्की कौशल और अनमोल पराशर की एक्टिंग और इस मूवी के डायलाग आपको बांधे रखेंगे। मूवी में कोई भी जबरदस्ती का इंग्लिश - हिंदी एक्सेंट नहीं डाला गया है ।


आदमी को मारा जा सकता हैं, उसके विचारों को नहीं और जिस विचार का वक़्त आया हो उसे वक़्त भी नहीं टाल सकता !!

- भगत सिंह





No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts