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कौन थीं फ़ातिमा शेख़ जिनका नाम इतिहास के पन्नो में गुमनाम हैं ?

Kavishala LabsKavishala Labs November 6, 2021
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जब आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो केवल एक आदमी शिक्षित होता है लेकिन एक स्त्री के शिक्षित होने से पूरी पीढ़ी शिक्षित होती है।

-अज्ञात 


हमारे समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कईं महिलाओं ने अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है कई के नाम तो इतिहास ने दर्ज किए हैं जिनके बारे में हम जानते हैं पर कई ऐसे महान क्रांतिकारी भी हुए जिनके नाम गुमनाम हैं पर उनके किए कार्य ने समाज की नीव मजबूत करने में अपना योगदान दिया है। अब आवश्यकता है उन नामों को उजागर करने की। आज का हमारा यह लेख एक ऐसी ही महान महिला पर है जिन्होंने महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रहीं सावित्रीबाई फुले का सहयोग किया था हांलाकि सावित्रीबाई फुले के सन्दर्भ में सभी जानते हैं जिन्होंने महिलाओं और दलितों के अधिकार के लिए कई आंदोलन चलाए और भारत का पहला कन्या स्कूल खोला था पर इस मुहीम में जिन्होंने उनका साथ दिया वो थीं फ़ातिमा शेख़। फ़ातिमा शेख़ सावित्रीबाई फुले की सहयोगी थी। उन्होंने और उनके भाई उस्मान शेख़ ने तब सावित्रीबाई फुले और उनके पिता को अपने घर में आश्रय दिया जब दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए आवाज उठाने के कारण उन्हें उनके घर से निकाल दिया गया था। उस्मान शेख और फ़ातिमा शेख़ की यह कहानी अभी के समय में जहाँ भाईचारा स्थापित करने की और एक होने की बात की जाती है ऐसे में सबसे बड़ा उदाहरण है जिसे जानना समय की आवश्यकता है। फ़ातिमा शेख़ ने केवल कन्या स्कूल खुलवाने की इस मुहीम में योगदान ही नहीं दिया बल्कि उस स्कूल में पढ़ाने का मोर्चा स्वयं उठाया ऐसा इसलिए क्यूंकि उस समय में शिक्षक बहुत कम थे।हालांकि यह इतना सरल नहीं था ,जब फातिमा और सावित्रीबाई ने ज्योतिबा द्वारा स्थापित स्कूलों में जाकर अध्यापन कार्य शुरू किया तब पुणे के लोगो ने उनका खूब विरोध किया यहाँ तक की वे लोग उन पर पत्थर फैंकते और कभी-कभी गाय का गोबर भी उन पर फैंका गया था। परन्तु साहसी फ़ातिमा डरी नहीं और सभी का सामना किया। फ़ातिमा शेख़ उन चुनिंदा मुस्लिम महिला शिक्षकों में से एक थी जिन्होंने समाज के विरूद्ध जा कर अध्यापन कार्य करना शुरू किया और दलितों को शिक्षित करने का कार्य किया। शेख़ ने फुले के पांचो स्कूलों में पढ़ाने का कार्य किया था। हांलाकि कई कारण है जिसके वजह से इतिहास के पन्नो में फ़ातिमा शेख़ का नाम गुमनाम रहा। फ़ातिमा शेख़ ने अपने या अपने कामों पर कभी कुछ नहीं लिखा वहीं सावित्रीबाई और उनके पति ज्योतिराओ फुले ने कई चीज़े लिखी जिसके कारण उनकी और उनके कामो की जानकारी उपलब्ध है। हांलाकि कारण कुछ भी रहा हो फ़ातिमा शेख़ का व्यक्तित्व इतिहास के पन्नो में आज भी लगातार अपनी पहचान की तलाश कर रहा है। 





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