साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में किन - किन को मिला पद्म सम्मान's image
Article10 min read

साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में किन - किन को मिला पद्म सम्मान

Kavishala LabsKavishala Labs November 11, 2021
Share1 Bookmarks 300 Reads2 Likes


सबसे उत्तम कार्य क्या होता है? – किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना खिलाना, जरूरतमंदों की मदद करना, किसी दुखियारे का दुख दूर करना, किसी घायल की सेवा करना आदि।

-ए.पी.जे अब्दुल कलाम


किसी भी क्षेत्र साहित्य और शिक्षा, कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान और मामलों आदि में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले नागरिकों को उनके कार्य के लिए पद्म पुरस्कार दिया जाता है जो भारत में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक हैं। देश के प्रथम नागरिक अतः राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान दिया जाता है। इन सम्मानों की तीन श्रेणियां होती हैं पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री। वर्तमान वर्ष २०२१ पद्म पुरस्कार ११९ प्राप्तकर्ताओं को प्रदान किए गए हैं। इस सूची में ७ पद्म विभूषण, १० पद्म भूषण और १०२ पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। इनमें पुरस्कार प्राप्त करने वाली २९ महिलाओं के नाम सूचीबद्ध हैं , १६ मरणोपरांत पुरस्कार विजेता और १ ट्रांसजेंडर पुरस्कार विजेता सम्मलित हैं। आज के हमारे इस लेख के माध्यम से हम साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेताओं पर एक नजर डालेंगे। 


शिक्षा क्या है ? क्या वह पुस्तक-विद्या है ? नहीं। क्या वह नाना प्रकार का ज्ञान है ? नहीं, यह भी नहीं। जिस संयम के द्वारा इच्छाशक्ति का प्रवाह और विकास वश में लाया जाता है और वह फलदायक होता है, वह शिक्षा कहलाती है।

-स्वामी विवेकानंद


सुजीत चट्टोपाध्याय : शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जो अतिचारों गरीबी और भुखमरी जैसी समस्याओं को दूर करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है पर आज के समय में शिक्षा का मूल्याङ्कन भी पैसो से किया जाता हैं जहाँ गाओं में उचित वयवस्था नहीं हो पाती न शिक्षक की संख्या कभी पूर्ण हो पाती में ऐसे में वास्तविक जीवन के नायक, बंगाल के रहने वाले सुजीत चट्टोपाध्याय ने 350 से अधिक आदिवासी और वंचित बच्चों को पढ़ाने का उठाया जिसके लिए एक वर्ष में मात्र २ रूपए में लेते हैं उनके इस योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री किया गया है। उनकी निशुल्क शिक्षा संस्था का नाम "सदै फकीर पाठशाला" है जो बंगाल में स्तिथ है।


डॉ. भगवान गोयल : हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दिखाने वाले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से रिटायर्ड डॉ. भगवान गोयल को शिक्षा एवं कला क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए पद्मश्री से मनोनित किया गया है। उन्होंने गुरुमुखी लिपि में उपलब्ध मध्यकालीन हिंदी साहित्य के विशाल खजाने को प्रकाश में लाकर पथ-प्रदर्शक शोध करने के साथ-साथ हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।


डॉ रजत कुमार कर : डॉ रजत कुमार कर एक प्रख्यात लेखक, नाटक-लेखक, टीकाकार और प्रशासक हैं जिन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया है । वह भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा उत्सव के लिए भी एक अनुभवी टिप्पणीकार हैं जिन्हे लगभग 7 नॉन-फिक्शन किताबें लिखी हैं।


उषा यादव: उषा यादव एक प्रसिद्ध लेखिका हैं जिन्होंने पिछले पांच दशकों में विभिन्न विधाओं में हिंदी भाषा में लगभग १०० पुस्तकें लिखी हैं। उनकी चुनी हुई रचनाएं कई राज्यों के सरकारी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में शामिल हैं।


तू सो जा, हां सो जा, मेरी लाडली,

मेरे घर की बगिया की नन्ही कली!

सपनों की दुनिया पुकारे तुझे,

वो दुनिया बड़ी ही सुहानी-भली।

परियों के बच्चों के संग खेलना,

तू भी उनके जैसी है नाजों-पली।

नयन मूंद झट से, न अब बात कर,

सोया शहर, सोई है हर गली!

-उषा यादव


दादूदन गढ़वी (मरणोपरांत) : दादूदन गढ़वी एक प्रसिद्ध गुजराती कवि और लोक गायक थे। उन्होंने गुजराती कविताये और गुजराती साहित्य में अपना योगदान दिया और लोकगीत को आगे बढ़ाने में कार्य किया जीके लिए इस वर्ष उन्हें मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया है


प्रो. सुंदरम सोलोमन पप्पिया: सुंदरम सोलोमन पप्पिया एक तमिल विद्वान, टेलीविजन व्यक्तित्व और अभिनेता हैं। एक अद्वितीय वक्ता, उन्होंने पिछले 25 वर्षों से 'पट्टीमंदरम' टीवी शो के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त की है। वहीं इस वर्ष उन्हें अपने किया कार्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। 


मृदुला सिन्हा (मरणोपरांत) : साहित्यिक, सांस्कृतिक को आगे बढ़ाने में दिए योगदान के लिए मृदुला सिन्हा को मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया है जिसे उनके पुत्र मृदुला सिन्हा लेने पहुंचे।


नामदेव चंद्रभान कांबले: नामदेव चंद्रभान कांबले एक शिक्षक ,पत्रकार और एक प्रसिद्ध मराठी लेखक हैं। वह न केवल कथा और कविता में बल्कि आलोचनात्मक और दार्शनिक लेखन के क्षेत्र में भी एक विपुल लेखक हैं जिन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। 


 डॉ कपिल तिवारी : लोक संस्कृतिवेत्ता डॉ कपिल तिवारी लोक कलाओं के गहरे जानकार हैं जिन्हे लोक साहित्य को बढ़ावा देने और अपने योगदान के लिए पद्श्री से सम्मानित किया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के अध्ययन, प्रलेखन और प्रकाशन पर केंद्रित तीस साल से अधिक समय बिताया है

वास्तव में इस सम्मान के पात्र वे लोग हैं जो अपने जीवन में अपनी परंपराओं को जीवंत रखे हुए हैं, अर्थात हमारे जनजातीय लोग और लोक समाज।

-डॉ कपिल तिवारी


प्रो. राम यत्ना शुक्ला : पद्मश्री से सम्मानित किए गए प्रो. राम यत्ना शुक्लाकाशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष हैं जिन्हे संस्कृत व्याकरण ,वेदांत शिक्षण और आधुनिकीकरण के नए तरीकों की खोज करने की दिशा में उनके दिए योगदान के कारण लोकप्रिय रूप से "अभिनव पाणिनी" जाना जाता है। 


डॉक्टर शेखावत : डॉक्टर शेखावत का नाम पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं सूची में शामिल कराने के लिए लिया जाता है। डॉक्टर शेखावत पिछले 30 सालों से राजस्थानी मायड़ भाषा को संविधान में शामिल कर इसे मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अपने मूल भाषा व् साहित्य को आगे बढ़ाने में योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।


डॉ श्रीकांत माधव दातार: श्रीकांत दातार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बिजनेस स्कूल का डीन हैं ।


डॉ. मंगलसिंह हज़ोवरी: बोडो भाषा और संस्कृति के विकास के लिए दिए अपने योगदान के लिए डॉ. मंगलसिंह हज़ोवरी को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


प्रो. आर. एल. कश्यप: प्रो. आर. एल. कश्यप ने वैदिक अध्ययन के क्षेत्र में मौलिक योगदान दिया है। 


डॉ असवादी प्रकाश राव: डॉ असवादी प्रकाश राव एक भारतीय कविकार, आलोचक, अनुवादक और विद्वान हैं, जो अपनी कविताओं और गद्य कार्यों के लिए जाने जाते हैं इसके अलावा वे एक प्रसिद्ध तेलुगु कवि और अष्टावधानी विशेषज्ञ भी हैं। 


डॉ. रोमन सरमाह: 90 साल पुरानी पत्रिका "बोर्डोइचिला" के संपादक डॉ. रोमन सरमाह एक प्रसिद्ध साहित्यकार, कविकार होने के साथ-साथ एक स्वतंत्र पत्रकार, नाटककार हैं भी हैं।  


बालम पुथरी: बालम पुथरी ने विभिन्न विषयों पर 211 पुस्तकें लिख में एक बड़ा योगदान है।


जगदीश चंद्र हलदर: समाज सेवा, स्वैच्छिक कार्य और गरीबों की सेवा के लिए निरंतर कार्य करने के लिए जगदीश चंद्र हलदर को पद्म सम्मान दिया गया है।


नंदा प्रुस्टी : जाजपुर में बच्चों और वयस्कों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने वाले 102 वर्षीय "नंदा सर" ने दशकों तक ओडिशा के लिए योगदान दिया है। 


अंततः वास्तविक अर्थों में शिक्षा सत्य की खोज है। यह ज्ञान और आत्मज्ञान से होकर गुजरने वाली एक महत्वपूर्ण और अंतहीन यात्रा है।

-ए.पी.जे अब्दुल कलाम



फादर कार्लोस जी. वैलेस (मरणोपरांत): फादर कार्लोस जी. वैलेस को फादर वैलेस के नाम से लोकप्रियता है जो एक स्पेनिश-भारतीय जेसुइट पुजारी और लेखक थे। पांच दशकों तक भारत में रहते हुए उन्होंने गुजराती में गणित पर विभिन्न पुस्तकें लिखीं जो प्रसिद्ध हैं। उन्हें यह सम्मान मरणोपरांत दिया। 


चंद्रशेखर कंबार : चंद्रशेखर कंबार एक कन्नड़ भाषा के कवि, नाटककार एवं लोकसाहित्यकार हैं। कन्नड़ साहित्य में दिए उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया है।   


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts