मंटो ज़िंदा है's image
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"ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहें हैं अगर आप उससे वाक़िफ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िए…"

किसने सोचा था आज के समय में भी इस शक्स की कही हुई हर बात उतनी ही सच्चाई से चुबेगी। क्योंकि आज भी इनकी हर कहानी समाज के आईने को बखूबी दर्शाती है।

सआदत हसन मंटो एक ऐसे मशहूर लेखक थे, जो अपनी लिखाई के लिए जीतने आबाद थे, उतने ही कुछ के लिए न बर्दाश्त भी थे।

इसलिए उनका कहना था, "अगर अप इन अफसानों को बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो इसका मतलब है कि ज़माना ही नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है।"

मंटो, एक ऐसा नाम है जिसकी पहचान उनके विवादित अफसानों से करते थे लोग। एक तरफ जहां उन्हें समाज की सच्चाई बताने के लिए सराहा जाता था, वहीं उनकी लिखी कहानियों की निंदा भी बहुत की जाती थी।

समाज की हर रूढ़िवादी सोच के खिलाफ खड़े रहने वाले मंटो ने हमेशा औरतों के हक़ के लिए आवाज उठाई। अपनी लिखाई से वैश्याओं के लिए समाज में एक स्थान बनाया। हर औरत को देखने का नज़रिया बदलने के लिए मंटो कहते थे, "जो लोग समझ नहीं पाते कि औरत क्या चीज़ है, उन्हें पहले ये समझने की जरूरत है कि - औरत चीज़ नहीं है।"

मंटो की हर कहानी में कई छोटी कहानियां होती थीं। बंटवारे के वक्त की त्रासदियों से गुजरते लोगों ने जो सहा, हर कदम पर जो देखा, उस समय सआदत हसन मंटो से बेहतर कोई बयां नहीं कर सकता था।

फिर चाहे वो कोर्ट केसिज़ हों या फतवे, उनकी कलम कभी नहीं रुकी जो बदनाम थी अपने कठोर लफ्ज़ों और समाज को सच्चाई बयां करने के लिए।

मंटो ने जो जैसा पाया, उसे वैसा ही दर्शाया। शायद इसीलिए उन्होंने अपने 43 साल के जीवन में जो भी लिखा, लोग आज भी उसे अब के समय से जोड़ कर पढ़ते हैं। क्योंकि आज भी जहां समाज में एक जगह बदलाव आ रहा है, वहीं एक तरफ कुछ लोगों की सोच उसी समय में अटकी हुई है।

मंटो वो शक्स हैं, जिनकी हर बात में गहराई और उसमें छुपा दर्द सरहानीय है। लोग जब उनकी लिखाई की गहराई में गए तब वो मंटो को समझे और साथ ही उनकी कहानियों के कई भाषाओं में अनुवाद भी किए। जिसके चलते मंटो सिर्फ पाकिस्तान और हिन्दुस्तान में ही नहीं, पूरी दुनिया में अपनी कहानियों के लिए चर्चित हुए।

जिन समस्याओं को हम आज समझते हैं और उन पर बात करते हैं, उन्होंने उन बातों पर तब लिखा था जब उनके बारे में सोचना भी गुनाह था।

मंटो जैसे खरे और स्पष्ट लेखक की कमी शायद ही कभी कोई पूरी कर पाए। शायद इसीलिए मंटो के देहांत के बाद उनकी कब्र पर लिखवाया गया था, "यहां मंटो दफ़न है जो आज भी ये समझता है कि वो लोह-ए-जहांन पर हर्फ-ए-मुकर्रर नहीं था।

(Here lies buried Manto who still believes that he was not the final word on the face of the earth).

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