शिक्षा ही विकासशील से विकसित होने का एक मात्र मार्ग है!'s image
Article5 min read

शिक्षा ही विकासशील से विकसित होने का एक मात्र मार्ग है!

Kavishala LabsKavishala Labs October 7, 2021
Share2 Bookmarks 755 Reads3 Likes

‘नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते’

-श्री कृष्ण(श्रीमद्भगवद्‌गीता)


शिक्षा ही विकासशील से विकसित होने का एक मात्र मार्ग है।अगर हमे देश को विकासशील से विकसित बनाना है तो हमें राजनीति पर नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। जिस दिन बाहरी बच्चों के मन में आएगा कि हमे भारत के स्कूलों और विश्वविद्यालों में जा कर पढ़ना है और जिस दिन भारत की शिक्षा व्यवस्था विश्व स्तरीय हो जायेगी ये देश विकसित हो जाएगा। तब हम गर्व से यह कह सकेंगे की भारत एक विकासशील देश नहीं एक विकसित देश है।

-मनीष सिसोदिया 


भारत एक विकासशील देश है जो विकसित होने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। अपनी स्थिति को विकासशील से विकसित बनाने के अथक प्रयास में जिसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है वो है देश की शिक्षा व्यवस्था। हम अक्सर ये सुनते हैं कि युवा ही देश का भविष्य है ,और रीढ़ की हड्डी है ऐसे में इन्हे पूर्ण शिक्षा मिलना देश की उन्नति के लिए अति अनिवार्य है।  हांलाकि भारत ने पिछले एक दशक में शिक्षा के क्षेत्र में काफी तरक्की की है, लेकिन अभी भी इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि भारत आज भी साक्षरता में बहुत पीछे है।सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि हर भारतीय को पूर्ण शिक्षा मिले।



बात करें साल 2011 तक के आंकड़ों कि तो उसके अनुसार भारत में 74 फीसदी नागरिक साक्षर हैं, जिनमे महिलाओं की साक्षरता दर 64.6 प्रतिशत है। वहीं शहरों के मुकाबले गावों में साक्षरता की स्थिति और निम्न है। 


वर्तमान शिक्षा स्थिति 


साक्षरता के क्षेत्र में विश्व में भारत का 131वां स्थान है। सरकार के लिए यह सुनिश्चत करना अनिवार्य है कि हर नागरिक को उसके शिक्षा का अधिकार मिले। शिक्षा की बात होने के साथ बात होती है उसके जमीनी ढांचें की,मूल रूप से किसी भी प्रशासन में उसकी व्यवस्था कि जहाँ भारत में दो प्रणालियाँ हैं सरकारी एवं निजी।

सरकारी स्कूलों की स्थिति पर नज़र डालें तो कुछ राज्यों को छोड़ अधिकतर राज्यों में स्थिति कुछ खास बेहतर नहीं हैं वहीं मध्यवर्ग के लिए निजी स्कूलों का खर्च उठा पाना बहुत कठिन हो जाता है जो विशेष कारन है गावों में साक्षर दर के कम होने का। सरकारी स्कूलों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। पूर्व राष्ट्रीयपति डॉ कलाम ने कहा था कि भारत के लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली को पूर्ण रूप से सुधारने की आवश्यकता है।अगर तुलना की जाए विकसित देशों से तो जहाँ भारत ने कई वर्षों से पाठ्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किए हैं वहीं ज्यादातर विकसित देश प्रत्येक २ वर्षों में अपने पाठ्यक्रम को बदलते हैं। 

सरकार के लिए आवशयक है यह सुनिश्चित करना कि छात्र का विकास हर दृष्टिकोण शारीरिक, मानसिक और नैतिक से पूर्ण हो।आवशयकता है छात्र के कौशल विकास पर मुख्य रूप से ध्यान देने कि और साथ ही संज्ञानात्मक और रचनात्मक को बढ़ावा देने की।साथ ही सरकार को यह सुनिश्चित करना भी जरुरी है कि जो शिक्षक शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं उन्हें पूर्ण प्रशिक्षण मिले क्यूंकि देश के आने वाला भविष्य की नीव उन्ही के हातों में हैं। विकसित देशों कि श्रेणी में शामिल होने के लिए भारत के लिए जरुरी है अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना हालांकि विगत वर्ष नयी शिक्षा निति प्रस्तावित हुई परन्तु अब भी कार्य होना अति आवश्यक है।२०१९ में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास १ दशक है विकसित देशों में जगह बनाने के लिए। अतः हमारे लिए आवशयक है कि हम उस दिशा में तीव्र गति से बढ़ें।   


''शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें''

-डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन










No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts