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कविशाला संवाद 2021: अभिव्यक्ति की आज़ादी और हिंदी-गौरव त्रिपाठी

Kavishala InterviewsKavishala Interviews October 19, 2021
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गालिब है हवालात में, प्रेमचंद के साथ में

मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ है, हथकड़ियां हैं हाथ में।

शायर-लेखक जब बिकने लगे, सब छोड़ कसीदे लिखने लगे,

ये दोनों बेहूदा हुए, बाकी लोगों से जुदा हुए।

-गौरव त्रिपाठी। 


कविशाला संवाद का हिस्सा बने जाने-माने कवि गौरव त्रिपाठी जो मुख्य रूप से युवाओं के बिच बहुत प्रसिद्ध हैं । कविशाला द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अभिव्यक्ति की आज़ादी और हिंदी के विषय पर गौरव त्रिपाठी जी के साथ चर्चा हुई। 


कविताएं माध्यम हैं अभिव्यक्ति की आज़ादी का इसको आप कितना सही मानते हैं ?


गौरव त्रिपाठी :मैं मानता हूँ कविताएं केवल अभिव्यक्ति में नहीं बल्कि हमे हमारी भावनाओं को समझने का जो प्रयास है उसमे मदद करती हैं। हम जब कोई कविता पढ़ते हैं तो हमे वो कविता केवल इसलिए नहीं पसंद आती क्यूंकि वो भावनात्मक होती है बल्कि इसलिए पसंद आती हैं क्यूंकि हमारे अंदर कई ऐसी भावनाएं होती हैं जिनको सामने लाने और समझने में मदद करती हैं साथ ही एक बेहतर समझ बनाने में ये कविताएं मदद करती हैं। 


एक लेखक के रूप में आका जनन कैसे हुआ ,आपको कब लगा कि  मैं लिख सकता हूँ ?


गौरव त्रिपाठी: ये एक रात में नहीं हो सकता ये एक प्रक्रिया है जो धीरे-धीरे आगे बढ़ती है मैं अपनी बात करूँ तो स्कूल में एक बार मैंने एक निबंध लिखा था जिसकी खूब तारीफ हुई थी तो तब थोड़ा लगा कि हाँ मेरा लिखा लोगो को पसंद आ सकता है। तो ये एक पूरी प्रक्रिया है पहली बारी में उतना बढ़ियां नहीं लिख पाते फिर धीरे-धीरे सुधार होता है और अच्छा लिखने लगते हैं।


हमारा देश और पूरी दुनिया ही एक वैश्विक महामारी कोरोना का सामना कर रही है ,सर पहले कई ओपन मिक किए जाते थे जहाँ कवि अपनी कविताओं को लोगो तक पहुंचाते थे इस महामारी के कारण ये कितना प्रभावित हुआ है ?


गौरव त्रिपाठी: हां बिलकुल प्रभावित हुआ है क्यूंकि पहले कॉलेजेस में कार्यक्रम होते थे आज नहीं हो पा रहे कोरोना के कारण ,तो वो एक बड़ा प्रभाव पड़ा है पर हाँ आप लेखक हैं तो आप पढ़ते भी हैं तो जो वरिष्ठ लेखक हैं उनके अनुभवों को जाना है उसके अलावा इस अंतराल में कई लेखकों के मन में कई सवाल उठे होएंगे जो मैं समझता हूँ जरुरी है लेखनी के लिए।


सर युवा लेखकों को आप कोई सन्देश अगर देना चाहें ?


गौरव त्रिपाठी: मुझे लगता है कोई भी जो आज लिख रहा है वो आज से १०-१५ साल आगे के लिए लिख रहा है और मैं मानता हूँ अच्छी लेखनी ही लेखनी का भविष्य है। मुझे लगता है आपके लिए जरुरी है चीज़ों को सही ढंग से समझना और जो परोक्ष चीज़े हैं उन्हें प्रत्यक्ष करना और ऐसा करने के लिए सही समझ को विकसित करना बहुत जरुरी है जिसके दो सबसे बढ़ियां तरीके मैं समझता हूँ पहला कमरे में बंद होकर किताबे पढ़ना और दूसरा घूमना नई जगहों पर जाना क्यूंकि मैं मानता हूँ घूमने से हमारा मानसिक और सामाजिक विकास पूर्ण रूप से होता है घूमना भी ऐसी जगहों पर जहाँ आपको कोई कहानी मिले आप इतिहास को समझ पाएं। तो मैं मानता हूँ लेखनी के लिए ये दो चीज़े करें तो बेहतर है।



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