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कविशाला संवाद 2021: मोह्ब्बत, हिन्दी और शायरी - अनामिका अंबर

Kavishala InterviewsKavishala Interviews October 5, 2021
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जो भूमि देवताओं की परम पावन विरासत है,

जहां सत्यम शिवम सुंदरम और हर क्षण मुहूर्त है,

धर्म-कर्म, संस्कृति, सभ्यता व काव्य का मंदिर,

हमें जिस पर है गर्व वो भारत है। 

-अनामिका अम्बर



किसी भी लेखक और उसकी लेखनी तब चर्चा का विषय बन जाती है जब लेखक द्वारा लिखा गया इस तरीके से लिखा या कहा गया हो की वो सीधे जाकर पढ़ने वाले या सुनने वाले के दिलो-दिमाग में छाप छोर दे। ऐसे ही लेखकों में चर्चित एक लेखिका हैं अनामिका अम्बर जी जो न सिर्फ उम्दा लिखती हैं बल्कि उतना ही बेहतरीन ढंग से उसकी प्रस्तुति भी करती हैं। आज के वक़्त में उनके लेखनी और प्रस्तुति के कई चाहने वाले हैं।अनामिका अम्बर उन लेखकों में शुमार हैं जिन्होंने बेहद कम उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था और मंचो व कार्यक्रमों में एक प्रसिद्ध बाल कलाकार  के रूप में पहचान हासिल कर ली थी। आपको बता दें डॉ अनामिका अम्बर ने पहला काव्य पाठ 1997 में चौदह वर्ष की अल्पायु में पढ़ा था। उन्होंने कई राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय मंचो पर प्रस्तुति दी है और कई टीवी शोज का भी हिस्सा रहीं हैं।  

कविशाला द्वारा आयोजित कविशाला संवाद में हिंदी मोहब्बत और शायरी विषय पर चर्चा करने के दौरान उन्होंने कई विशेष मुद्दों पर अपनी राय रखी और साथ ही अपनी रचनाओं की प्रस्तुति की। 


मैम आपने इतनी छोटी सी उम्र से ही लिखना प्रारम्भ कर दिया ,क्या कोई विशेष कारण रहा लेखनी शुरू करने के पीछे ?


अनामिका अम्बर :मैंने ९ वर्ष की उम्र से लिखना शुरू कर दिया था। क्यूंकि मैं जैन धर्म से सम्बन्ध रखती हूँ तो हमारे यहाँ साधुओं का समागम  होता था जो अपने परिवचनों में कविताओं का प्रयोग करते थे कहीं न कहीं वो एक प्रेरणा श्रोत रहा साथ ही मैं बुन्देलखंड से आती हूँ जो कलाकारों से, विशेष रूप से साहित्यकारों से उपजाऊ जमीन है ,वहां कई सम्मेल्लम हुआ करते थे जिसका खासा असर हुआ। हांलाकि मेरे परिवार में कोई  भी कवि नहीं है तो इन्ही सम्मेलनों में जाना कविओं से मिलना एक प्रेरणा श्रोत रहा। 


जैसा की आप एक कलाकार हैं आपको दो तरीकों के प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ता होगा एक सकारात्मकता और कई बार नकारात्मकता इन  प्रतिक्रियाओं को आप कैसे लेती हैं और एक कलाकार को कैसे लेना चाहिए ?


अनामिका अम्बर :किसी भी मुकाम को हासिल करने के लिए तपस्या करनी परती है ,सीढियाँ चढ़नी पड़ती हैं अगर आप ये सोचें  कि आप सीधे छलांग लगा कर वहां पहुँच जाएंगे तो गिरने का डर है। मैं एक लेखिका हूँ मैं हर काम को करने के लिए स्वतंत्र हूँ लेखनी के लिए स्वतंत्र हूँ ऐसे में यदि कोई नकारात्मकता फ़ैलाने की कोशिश करता है तो मैं उन्हें केवल प्रणाम कहना चाहूंगी क्यूंकि कहीं न कहीं उन्ही की बद्दुआओं से मेरी तक़दीर बन रही है।


हम देखते हैं कि हमारी सरकार हमारे प्रधानमंत्री अंतराष्ट्रीय मंचो और सभाओं में हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं।  हांलाकि व्यक्तगिगत तोर पर तो यह हर भारतीय की जिम्मेदारी होनी चाहिए ही  कि वे अपनी भाषा को आगे रखे  पर क्या सरकार की तरफ से भी कोई विशेष योगदान होने चाहिए जिससे हर भारतीय हिंदी बोलने के लिए प्रेरित हो जो शायद कहीं न कहीं पीछे छूट रही है ?


अनामिका अम्बर :वर्तमान स्थिति की बात करूँ तो हमारे प्रधानमंत्री द्वारा आज विशेष मंचो पर हिंदी का प्रयोग किया जा रहा है जिससे लोगो के अंदर हिंदी को लेकर एक आत्मविश्वास बना है ,हांलाकि पहले भी एक दौर था जब हिंदी को लोग सम्मान की नज़र से ही देखते थे परन्तु कहीं न कहीं वो एक विश्वास नहीं था अपनी ही भाषा को लेकर जो आज देखने को मिला है। जब मैं अपने बच्चों का विषय चयन कर रही थी तो मैंने संस्कृत चयन किया और मैंने ही नहीं कई बच्चो के अभिभावक ने उन्हें संस्कृत चयन कराया जो दर्शाता है  कि  है एक विश्वास और प्रेरणा का जनन हुआ है हिंदी को लेकर। मैं बात करू कविशाला की ही तो आपने कितने ही कार्यक्रम किए हैं  सिर्फ हिंदी के लिए इस कोरोना काल में भी इतने कार्यक्रम हो रहे हैं हिंदी को सम्मान देने के लिए तो मैं कह सकती हूँ कि एक बहुत बड़ा फर्क आया है जो आने वाले वक्त में पूर्ण रूप से दिखेगा, और जहाँ तक मैं देख सकती  हूँ सरकार भी अपना कार्य कर रही है।

युवा कवियों के नाम कोई सन्देश ?


अनामिका अम्बर :यूनिक रहना सबसे महत्त्वपूर्ण है अगर आप किसी को फॉलो करते हैं तब भी आपके लिए जरुरी है कि आप अपनी अलग छवि रखें आप उनसे सीखें परन्तु कॉपी करने का प्रयास न करें। नया लाने-नया करने का प्रयास रखें । अगर आपको कोई बड़ा किसी भी प्रकार का कोई सुझाव देता है तो उसे सम्मान सहित लें जो बेहद जरुरी है पर अपनी एक समझदारी भी साथ रखें क्यूंकि कई बार लोग आपको टोकते हैं जिससे आपका आत्मविशवास भी कम हो जाता है तो आपको ध्यान रखना है कौन आपका हितेषी है कौन नहीं। 













 


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