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विश्व दयालुता दिवस : एक गर्मजोशी से भरी मुस्कान दयालुता की वैश्विक भाषा है।

Kavishala DailyKavishala Daily November 13, 2021
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दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान |

तुलसी दया न छांड़िए ,जब लग घट में प्राण ||

-गोस्वामी तुलसीदास 


जैसा की हिंदी साहित्य के प्रख्यात लेखक प्रेमचंद कहते थे कि दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। अतः हर व्यक्ति के लिए दया का भाव अनिवार्य है। तनिक भर की दयालुता भी कभी - कभी इतनी मूल्यवान हो जाती है कि उसके सामने पैसो को मूल्य घट जाता है। एक आत्म संतोष का जनन होता है जो सकारात्मकता का सृजन करता है और समाज को और समृद्ध करने का कार्य करता है। 


जहाँ दया तहँ धर्म ,जहाँ लोभ तहँ पाप। 

जहाँ क्रोध तहँ काल है ,जहाँ छमा आप।। 

-कबीरदास  


दयालुता के भाव व् आज के विश्व में जहाँ हर व्यक्ति के लिए जरुरी है दया भावना को सृजित करना ऐसे में १३ नवंबर को प्रत्येक वर्ष विश्वभर में विश्र्व दयालुता दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत और संगठित दोनों ही स्तरों पर समाज में दया और करुणा का भाव स्थापित करना है। इसकी शुरुआत १९९८ में वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट द्वारा की गई थी। हांलाकि यह दिवस हमारे देश भारत ने २००९ में पहली बार मनाया था। आज के समय में इस मूवमेंट में २८ देश शामिल हैं।


जब तक संभव हो दयावान रहें ,और यह हमेशा संभव है। 

-दलाई लामा 


वर्तमान वर्ष २०२१ में विश्व दयालुता दिवस का विषय है - विश्व हम बनाते हैं - दयालुता को प्रेरित करते हैं। दयालुता एक शस्त्र है जिसका उपयोग कर विश्व को एक बेहतर और उज्जवल भविष्य दिया जा सकता है । जैसा की भगवत गीता में कहा गया है दया ही सबसे बड़ा धर्म है |यानी दया और करुणा से बड़ा कोई धर्म या जाती नहीं। विश्व दयालुता दिवस का उद्देश्य जो धर्मजाति ऊंच-नीच से परे है। दया का धर्म किसी भी धर्म से बढ़ कर है। दया और करुणा का भाव लोगो के बिच एक मजबूत सम्बन्ध स्थापित करने का कार्य करता और किसी भी राष्ट्रिय को जोड़ने में अहम् भूमिका निभाता है। अतः एक गर्मजोशी से भरी मुस्कान दयालुता की वैश्विक भाषा है


दया के छोटे -छोटे से कार्य ,

प्रेम के जरा - जरा से शब्द हमारी पृथ्वी को स्वगरोपं बना देते हैं। 

जूलिया कार्नी 


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