Saadat Hasan Manto's image
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क ऐसे शख़्स जिनकी कहानियाँ बेबाक और समाज का सच दिखाती थी। जो अपनी कहानियों को लेकर कई बार अदालत तक जा चुके थे। जिनकी कहानियाँ पढ़कर लोग आज भी उन पालो को जीते हैं जो कहानियों में लिखा हुआ है। यहाँ जिनकी बात हो रही है उनका नाम सआदत हसन मंटो है जिनकी कहानियों को भारत, पकिस्तान और दुनिया भर के देशों में प्यार मिला है। ये वही कहानीकार है जिनकी जिंदगी पर फिल्म भी बन चुकी है और मंटो का किरदार मशहूर अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया था। जो लोग साहित्य प्रेमी है उन्होंने उनकी कहानियाँ पढ़ी और सुनी होगी। भारत के साथ-साथ उनका पाकिस्तान और अन्य देशों में भी बड़ा नाम है। सालो पहले दुनिया से अलविदा करने के बावजूद भी उनकी कहानियाँ कविताएँ आज भी हमारे बीच ज़िंदा है। मंटो की कहानियाँ जितनी चर्चित थी उससे ज़्यादा विवाद का विषय भी रही। क्योंकि उनकी कहानियाँ जितनी सच्ची थी उतनी ही साफ़ थी और यही वजह थी की जिसे बर्दाश्त कर पाना समाज के बस में नहीं था। उस समय मंटो को बदनाम कहानीकार के रूप में जाना जाता था क्योंकि नंगे और खोकले लोगो की सच्चाई समाज को अश्लील लगती थी। मंटो की कहानियों में महिलाएं काल्पनिक नहीं होती थीं। उन पात्रों को पढ़कर ऐसा लगता था कि यह हमारे समाज का हिस्सा है, जिन पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। जैसे ही यह पर्दा हट जाएगा, समाज का नंगा चरित्र सामने आ जाएगा।


सच कहें तो मंटो की कहानियां अपने समय से बहुत आगे थीं, जिसमें समाज में फैले पाखंड और महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के बारे में खुलकर लिखा गया है। मंटो की कहानी ‘ठंडा गोश्त’ में ईश्वर की पत्नी का बेहद बेबाक और मजबूत किरदार पेश किया गया है। कहानी उस दौर की है, जब मुसलमानों, हिंदुओं और सिखों के बीच लड़ाई चल रही थी। उस दौर में पुरुष एक-दूसरे के समुदाय की महिलाओं का बलात्कार कर रहे थे। कहानी का पात्र ईश्वर एक लाश के साथ बलात्कार करके आता है, जिस बात का पता चलते ही कलवंत(उसकी पत्नी) अपने पति हत्या कर देती है। मंटो की इस कहानी को लेकर पाकिस्तान में खूब विवाद हुआ, जिसके कारण उन पर मुकदमा भी चलाया गया। पाकिस्तान की कोर्ट ने मंटो पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगया था, साथ ही इस कहानी पर भी पूरी तरह से बैन लगा दिया गया। जब भारत-पाकिस्तान का बटवारा हुआ था तो वो मंज़र बेहद दर्दनाक था, जिसके असर लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। मंटो की कहानी ‘खोल दो’ में उसी बटवारे का हाल दिखाया गया। कहानी एक लड़की की है जिसका अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया जाता है, लड़की के पिता उसे राहत शिविर उसे पागलों की तरह खोजता रहता है। आखिरकार वह लड़की एक अस्पताल में मिलती है, जहाँ डॉक्टर द्वारा ‘खोल दो’ बोलने पर लड़की अपना सलवार खोलने लगती है। मंटो की यह कहानी बंटवारे के दौरान महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को दर्शाती है। माना जाता है कि उस दौर में बलात्कार के बाद ज्यादातर महिलाएं आत्महत्या कर लेती थीं, लेकिन इस मुद्दे को मुख्यधारा से बिल्कुल दूर रखा गया था। उस दौर में मंटो को असभ्य और अश्लील करार दिया गया था।


उनकी कहानियों को उन विषयों पर खुलकर लिखा जाता था, जिसके बारे में समाज में बात करना भी वर्जित हुआ करता था। उन्होंने अपनी कहानियों में महिलाओं की कामुकता पर खुलकर बात की है। इतना ही नहीं उनकी ‘स्तन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिसे उस दौर में अश्लील और बोल्ड माना जाता था। एक पुरुष द्वारा महिलाओं पर इतने बेबाक तरीके से लिखने के कारण समाज में उन्हें बहुत बुरा भला कहा गया। उनपर अक्सर महिलाओं के शरीर का विस्तार से वर्णन करने का आरोप भी लगाया जाते थे, जिस वजह से उनकी कहानियों के महिला पात्र बेहद खुले हुए नजर आते थे। मंटो को शोहरत के साथ बदनामी भी मिली। उन्होंने अपनी कहानियों में समाज का नंगा चित्रण किया है, जिसे उस दौर में अपना पाना मुश्किल था। मंटो की कहानियों में गाली-गलौज और बेबाक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो अक्सर हमारे आसपास सुनाई देते हैं। उनकी कहानियां सभ्यता का नकाब ओढ़े समाज को चुनौती देती हैं, यही वजह है कि ये कहानियां लंबे समय तक विवाद का विषय बनी रहती हैं। रोप भी लगाया जाते थे, जिस वजह से उनकी कहानियों के महिला पात्र बेहद खुले हुए नजर आते थे।

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