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अवतार सिंह संधू

Kavishala DailyKavishala Daily November 20, 2022
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वतार सिंह संधू जिन्हें सब पाश के नाम से जानते हैं पंजाबी कवि और क्रांतिकारी थे।अवतार सिंह पाश उन चंद इंकलाबी शायरो में से है, जिन्होंने अपनी छोटी सी जिन्दगी में बहुत कम लिखी क्रान्तिकारी शायरी द्वारा पंजाब में ही नहीं सम्पूर्ण भारत में एक नई अलग जगाह बनाई थी।


 जो जगह क्रान्तिकारियों में भगत सिंह की है वही जगह कलमकारो में पाश की है। इन्होंने गरीब मजदूर किसान के अधिकारो के लिये लेखनी चलाई, इनका मानना था बिना लड़े कुछ नहीं मिलता उन्होंने लिखा "हम लड़ेंगे साथी" तथा "सबसे खतरनाक होता है अपने सपनों का मर जाना" जैसे लोकप्रिय गीत लिखे। आज भी क्रान्ति की धार उनके शब्दों द्वारा तेज की जाती है। पाश का जन्म 9 सितंबर 1950 को पंजाब के जालंधर जिले के तलवंडी सलेम नामक एक छोटे से गाँव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में अवतार सिंह संधू के रूप में हुआ था।


 उनके पिता सोहन सिंह संधू भारतीय सेना में एक सैनिक थे, उनके पिता को कविताये रचने एवं गाने का शौक था। 1970 में, उन्होंने 18 साल की उम्र में अपनी क्रांतिकारी कविताओं की पहली पुस्तक, लोह-कथा प्रकाशित की।उनके बागी और उत्तेजक स्वर ने सो चुकी चेतना को जगाया। उनके खिलाफ हत्या का आरोप लगाया गया। आखिरकार बरी होने से पहले उन्होंने लगभग दो साल जेल में बिताए। वह पंजाब के माओवादी मोर्चे में शामिल हुए। उन्हें 1985 में पंजाबी अकादमी ऑफ़ लेटर्स में एक फ़ेलोशिप से सम्मानित किया गया। उनहोनें अगले वर्ष यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा किया। अमेरिका में, वह सिख विरोधी चरमपंथी हिंसा का विरोध करते हुए, एंटी-47 मोर्चे के साथ शामिल हो गए। उनके शब्दों का लोगों के दिमाग पर बहुत गहरा प्रभाव था।


1988 की शुरुआत में पाश संयुक्त राज्य अमेरिका से अपने वीजा के नवीकरण के लिए पंजाब में थे। दिल्ली रवाना होने से एक दिन पहले, उन्हें 23 मार्च 1988 को खालिस्तानी चरमपंथियों ने गाँव के कुए के पास उन्हें गोली मार दी थी। इस तरह पंजाबी के इस महान कवी की 38 साल की उम्र में ही हत्या कर दी गयी।

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