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सादगी से परिपूर्ण एक व्यक्तित्व - ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

Kavishala DailyKavishala Daily October 15, 2021
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तब तक लड़ना मत छोड़ो जब तक अपनी तय की हुई जगह पर ना पहुँच जाओ- यही, अद्वितीय हो तुम। ज़िन्दगी में एक लक्ष्य रखो, लगातार ज्ञानप्राप्त करो, कड़ी मेहनत करो, और महान जीवन को प्राप्त करने के लिए दृढ रहो।

-ए.पी.जे. अब्दुल कलाम


एक लेखक तब स्मरणीय हो जाता है जब उसकी लिखी रचना किसी मनुष्य के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने का कारण बन जाए।आज एक ऐसे ही प्रेरक व्यक्तित्व जिन्होंने अपने अनुभवों को लिख कर लाखों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्मदिन है। कलाम साहब बचपन में पायलट बनना चाहते थे परंतु किन्हीं कारणों से नहीं बन पाए। ऋषिकेश जाकर नई उड़ान के बारे में सोचा और अपने करियर को अंतरिक्ष के क्षेत्र की ओर मोड़ लिया। डॉ कलाम का मानना था कि हमे असफलता से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि किसी भी मनुष्य के लिए असफलता और शोक के बिच मिलने वाले प्रेरणा को ग्रहण करना आवशयक है।

बारिश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है, लेकिन बाज बादलों के ऊपर उड़कर बादलों को ही अवॉयड कर देते हैं। समस्याए कॉमन है, लेकिन आपका एटीट्यूड इनमे डिफरेंस पैदा करता हैं।

-ए.पी.जे. अब्दुल कलाम


अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम् जिले के धनुषकोड़ी गांव में हुआ था।अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पक्कीर जैनुलआबेदीन अब्दुल कलाम था। बात करें उनके बचपन की कलाम का बचपन आर्थिक अभावों में बीता। इनके पिता मछुआरों को बोट किराए पर देते थे। कलाम के पिता जैनुलआबेदीन भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे लेकिन उच्च सोच वाले व्यक्ति थे। कलाम ने अपनी आरम्भिक शिक्षा रामेश्वरम् में पूरी की, सेंट जोसेफ कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।


जीवन शैली :

बात करें कमाल साहब के जीवन शैली की तो वे बेहद सादगी भरा और अनुशाशनिक जीवन जीने में विश्वास रखते थे। अनुशासन और दैनिक रूप से पढ़ना इनकी दिनचर्या में था। उनका मन्ना था अगर आप किसी चीज़ को हासिल करना चाहतें हैं तो आपके लिए आवश्यक है अपनी तीव्र इक्षा रखना।  इतने बड़े पद पर होने के बावजूद शानो-शौख़त से दूर रहते थे। यहाँ तक की जब एक बार राष्ट्रपति भवन में उनके परिजन रहने के लिए आए उनका स्वागत उन्होंने बहुत अच्छे से किया। परिजन 9 दिन तक राष्ट्रपति भवन में रहे जिसका खर्च साढ़े तीन लाख रुपए हुआ, जिसका बिल उन्होंने अपनी जेब से भरा।

कैसा रहा वैज्ञानिक जीवन :

विज्ञान मानवता के लिए एक खूबसूरत तोहफा है, हमें इसे बिगाड़ना नहीं चाहिए।

-ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

जैसे की लेख के प्रारम्भ में बताया गया है कि अब्दुल कलाम का सपना था ,वे पायलट बनना चाहते थे परंतु किन्हीं कारणों की वजह से वे पायलट नहीं बन पाए। जिसके बाद 1962 में वे अंतरिक्ष विभाग से जुड़ गए जहां उन्हें विक्रम साराभाई, सतीश धवन और ब्रह्म प्रकाश जैसे महान हस्तियों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कलम साहब ने 1980 में पूर्ण रूप से भारत में निर्मित उपग्रह रोहिणी का प्रक्षेपण किया जो सफल रहा। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन में रहते हुए कलाम साहब ने पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइल का ऑपरेशनल किया और भारत के राजस्थान में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण (शक्ति2) को सफल बनाया।


लेखक के रूप में कलाम साहब :

 कलाम साहब के महान लेखक थे उन्होंने समाज को अपनी लेखनी से आइना दिखाने का कार्य किया। वे ऐसे विषयों पर लिखते थे जो अमूमन नजरअंदाज कर दी जाती हैं। उदाहरण के लिए २०११ में प्रकाशित हुई किताब टारगेट ३ बिलियन (Target 3 Billion) जिस किताब में अब्दुल कलाम जी ने दुनिया की आधी आबादी के बारे में बताया जो गरीबी रेखा के निचे हैं और मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में रहते हैं ,ऐसे लोगो तक कैसे पहुंचा जाए और किस प्रकार से हम उन्हें मूल-भुत सुविधाएँ दे सकते हैं इन विषयों पर कलाम जी ने अपनी इस किताब में बात की है।

कलाम साहब प्रकति के बेहद नजदीक थे जिसकी झलकियां उनकी कृत्यों में साफ़ झलकती हैं। इसके साथ साथ कलाम साहब ने राष्ट्र ,जवानो और किसानो पर पर कवितायेँ लिखी। कलाम साहब के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान था उनकी लाइब्रेरी जिसे वह अपनी धरोहर मानते थे। वे अपना ज़्यादा से ज़्यादा समय किताबे पढ़ने में ही व्यतीत करते थे क्यूंकि उनका मानना था कि किसी भी किताब को लिखने से पूर्व आवशयक है अध्यन करना ,वो कहते थे जब तक आप चीज़ों को पढ़ेंगे नहीं उसकी वास्तविकता कैसे जानेंगे और कैसे लिखेंगे ,इसलिए पढ़ना अति आवश्यक है। कलाम साहब एक पन्ना लिखने के लिए भी आधे से ज़्यादा किताब पढ़ जाया करते थे उनका मानना था की आप जो लिख रहे हैं वास्तव में उसे कोई पढ़ेगा एक तोर पर उसकी बातचीत किताब के माध्यम से हमसे होगी तो जरुरी हैं हम सिद्धांतवादी बातें उन तक पहुँचाने का कार्य कर


अगर हम आज़ाद नहीं हैं तो कोई भी हमारा आदर नहीं करेगा

-ए.पी.जे. अब्दुल कलाम


आलोचना करने से पहले जरुरी है विकल्प को जानना : महान वयक्तिव कलाम साहब आलोचना करने पर विशवास नहीं रखते थे उनका मानना था की किसी भी व्यक्ति की आलोचना करने से पूर्व हमारे लिए यह जानना जरुरी है की वास्तव में उसका कोई विकल्प है भी या हम केवल आलोचना करने के लिए कर रहे हैं। क्यूंकि किसी की गलती निकालना सरल है परन्तु आलोचना की जिम्मेदारी लेना नहीं।


हम केवल तभी याद किये जायेंगे जब हम हमारी युवा पीढ़ी को एक समृद्ध और सुरक्षित भारत दें, जो आर्थिक समृद्धि और सभ्यता की विरासत का परिणाम होगा। 

-ए.पी.जे. अब्दुल कलाम


बच्चो के काफी नज़दीक थे कलाम : कलाम साहब बच्चो के बहुत नजदीक थे वे विश्वविद्यालों में बच्चो के बिच जा कर विज्ञान का जीवन में महत्व बताते थे। अब्दुल कलाम को पीपुल्स प्रेसीडेंट भी कहा जाता था। विद्यर्थियों के प्रति प्रेम को देखकर संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन को विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।कलाम साहब एक वैज्ञानिक थे ,परन्तु अध्यात्म से भी उतना ही जुड़े थे हम कई बार सुनते हैं या पढ़ते हैं की विज्ञानं और अध्यात्म को एक पलड़े में नहीं उतारा जा सकता कलाम साहब ने वैज्ञानिक होते हुए कई अध्यात्म की किताब लिख इस धरना को ख़तम किया। 

प्रेरक व्यक्तित्व कलाम साहब को देश के लिए दिए योगदानो के लिए सर्वोच्चय भारतीय सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। 


यदि चार बातों का पालन किया जाए – एक महान लक्ष्य बनाया जाए, ज्ञान अर्जित किया जाए, कड़ी मेहनत की जाए, और दृढ रहा जाए – तो कुछ भी हासिल किया जा सकता हैं।

-ए.पी.जे. अब्दुल कलाम


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