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।। रस्ता पुराना ।।

kavimay12345kavimay12345 May 8, 2022
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अधूरा सा टूटा ये रस्ता पुराना
सजे बाँस मे दिमक का खजाना
किनारे किनारे किस्से पुराने
शहर को लपकते सपने सुहाने

लकीरें किस्मतों की लिखी है,गढ़ी है
कहीं पाँव मलमल कहीं छाँलों की दरी है
बिन मौसम के पगलाए बारिश की बूँदे
हवाओं के अकड़ मे ठण्डक सी घोले

वो दिन जो बगीचों मे बीते
मेरे मन मे जीवन के बीजों को सींचे
पत्ते तिनकों से खिलौनों की जुगत जो रही
वो बचपन के सारे सच को कह रही

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