।।माँ।।'s image
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तुझसे कुछ कह ना पाऊँ
खुद से खुद को बहलाऊँ
मन की खामोशी
तू ही तो समझे ना माँ
मेरी माँ .....
तेरे एहसासों की नरमी सी धूप चुनूँ
रात के अन्धेरो मे चाँदनी रूप बुनूँ
मेरा खयाल है ,मेरी परछाई
हाथों की लकीरें, तूने ही बनाई
मेरे जींदगी की रौशनी है
तू ही तो मेरी खुशी है
मेरी माँ....

रुका हूँ सहम के खुद से
मुझको सम्भालेगी माँ
हारा हूँ खुद के मन से
आँचल में छुपायेगी माँ
मेरी माँ .....
तेरे खामोशी के जज्बात सुनूँ
फिर एक मीठी सी आवाज चुनूँ
तू मेरे जीवन का रंगीन परदा है
जिसपे मेरा किरदार चलता है
तू मेरे हर सवाल का तू जवाब है
तू ही मेरे जीवन का सच्चा किताब है।
मेरी माँ........।।

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