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।। कारवाँ गुजरता गया ।।

kavimay12345kavimay12345 July 5, 2022
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सिलसिले मे कदम बढ़ता गया
कारवाँ गुजरता गया.....

मै होश मे था पर खामोश था
अंदर की आग मे जोश था
नैतिक पग का सन्दर्भ बनता गया
जीवन का प्रसंग बदलता गया ।

जो झूठ था वो झूठ ही है
जो सच था वो सच ही है
विश्वास से भरे हृदय को साथ मिलता गया
मूल्यों से कर्म का किताब भरता गया ।

स्याह नील,लाल हो या काली
लिखे वही जो सोखती हो मन की क्यारी
भरम से भरा संसार सजता गया
उसी मे पल कर मेरा अरमान सँवरता गया ।

भौतिकी मे भँवर के रूप अनेक है
मीठे मीठे चाशनी हो, मधूप अनेक है
धुंध धूप का फैलता गया
आध्यात्म के सुगन्ध मे रमता गया ।

सिलसिले मे कदम बढ़ता गया
कारवाँ गुजरता गया.....।।

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