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।। अन्तर्मन ।।

kavimay12345kavimay12345 May 15, 2022
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कब तक कहाँ तक ?
मन के जहाँ तक
लिखूँ रौशनी .......

नील हरहर समंदर मे चमचमाती चाँदनी
काली रात के शोर मे गुनगुनाती रागिनी
लिए अन्तर्मन मे जीवन की गहरी कहानी
बाहर हिलोरें लेती झिलमिल समंदर का पानी

विकट रास्ते, रास्तों मे है काँटे
मन का भरम, भरम धीरे से काटे
हल्की हल्की सी वो चुभन एक दिन
बाँट दे जीवन के वो सारे नाते

समय सरफिरा या मेरा सर फिरा
मन मे कौतूहल का ये क्यूँ सिलसिला ?
बेवजह रूठती क्यूँ मेरी परछाई ?
थमती सांसे,और फिर आंखे भर आई.......

फिर मै कहूँ
कब तक कहाँ तक ?
मन के जहाँ तक
लिखूँ रौशनी
बिखरे रंग मौसमी
गीत सहज माधुरी
मन हो मुखर बावरी..........।।

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